प्रहरी संवाददाता/मुंबई। प्राचीन परंपराओं के अनुसार सिंधी समाज के लोगों ने बुधवार शाम को जल देवता झूलेलाल को चेंबूर के आशीष तालाब पर बिदाई दी। समाज के आस्थावानों ने अब भी परंपराओं को बरकरार रखा है। जल देवता झूलेलाल को कई नामों जाना जाता है। इन्हें वरन देवता, बाबा झूलेलाल, चालिया साहेब आदि।
इस पर्व को समाज के पूर्वजों ने न केवल भव्य रूप दिया है, बल्कि इस पर्व की गरीमा को बरकरार रखने के लिए सिंधी समाज के वर्तियों को काफी सावधानी बरतने की हिदायत भी दी है। करीब चालीस दिनों तक चले इस पर्व को लगभग छह दशक से चेंबूर के वरनपुरी जल आश्रम पूज्य पंचायत द्वारा मनाया जाता है।

मान्यताओं के अनुसार चालिया साहेब के पावन पर्व को हिंदू पंचांग के अनुसार ”श्रावण माह” में मनाया जाता है। जबकि अंग्रेजी कैलेंडर (English Calender) के अनुसार इस पर्व को हर साल 16 जुलाई से 24 अगस्त तक मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस त्योहार की तारीखों में कोई बदलाव नहीं होता। पूज्य पंचायत के ट्रस्ट (Trust of Pujya Panchayat) के अध्यक्ष अजय तलरेजा, आदि।

उपाध्यक्ष रमेश लोहाना, सचिव वासूदेव भांमबानी और ट्रस्टी किशोर टेकचंद हैं। बुधवार शाम को जल देवता झूलेलाल को चेंबूर के आशीष तालाब पर विदाई दी गई। यहां बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने पूजा अर्चना की और पूजा के प्रसाद को तालाब में डाला। इसके आलावा बड़ी संख्या में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
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