बेहतर समाज निर्माण में सभी का सहयोग अपेक्षित-उपायुक्त
एस.पी.सक्सेना/देवघर (झारखंड)। प्रोजेक्ट पंछी के सफल क्रियान्वयन को लेकर 24 अगस्त को देवघर जिला उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री (Deoghar district deputy commissioner Manjunath bhajantri) की अध्यक्षता में (24 से 28 अगस्त तक) पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ विकास भवन सभागार में किया गया।
इस दौरान बाल संरक्षण समिति के गठन के पश्चात गठित समितियों का सुदृढ़ीकरण एवं सक्रिय रखने हेतु किये जाने वाले कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गयी। कार्यक्रम के दौरान महिला पर्यवेक्षिकाओं को प्रशिक्षुओं द्वारा प्रोजेक्ट पंछी से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गयी।
कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते हुए उपायुक्त भजंत्री द्वारा जानकारी दी गयी कि प्रोजेक्ट पंछी को योजना या सरकारी कार्यक्रम समझकर कार्य करने की जगह समाज की जरूरतों और आवश्यकताओं के प्रति अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के उदेश्य से कार्य करें।
ताकि सही मायने में प्रोजेक्ट पंछी का लाभ बच्चों को मिल सके। उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या, बेटा-बेटी में असमानता, बाल विवाह, बाल मजदूरी को खत्म करने के उदेश्य से प्रोजेक्ट पंछी की शुरूआत जिले में की गयी।
हमारे आने वाले कल अर्थात बच्चों को सुरक्षा का अधिकार, सहभागिता का अधिकार, जीने का अधिकार व विकास का अधिकार पूर्ण रूप से मिले ये हम सभी को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में समाज निर्माण का अर्थ सिर्फ भवन निर्माण या सड़क निर्माण नहीं है। समाज को सही दिशा व गति देने का अर्थ है, बच्चों को बेहतर भविष्य देना। ऐसे में मास्टर ट्रेनरों से मेरा आग्रह होगा कि अपने-अपने पंचायतों में अपने टीम के साथ जमीनी स्तर पर इस दिशा में कार्य करें, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव हो सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त भजंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट पंछी का मुख्य उदेश्य लोगों को जागरूक करते हुए इस अभियान से जोड़ना है। ऐसे में ग्रामीण बाल संरक्षण समिति (VCPC) को पूर्ण रूप से सक्रिय करना आवश्यक है।
उपायुक्त ने जिले के सभी प्रखंडो में ग्रामीण बाल संरक्षण समिति को सक्रिय और सुदृढ़ करने से जुड़े विभिन्न बिंदुओ पर चर्चा करते हुए इस दिशा में बेहतर कार्य करने के उद्देश्य से तेजस्वनी क्लब की दीदियों को जोड़ने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सही मायनों में इस दिशा में कार्य किया जा सके।
उपायुक्त ने कहा कि सरकार की ओर से बच्चों की सुरक्षा, विकास एवं देख-रेख के लिए विभिन्न तरह की समितियां गठित की गई है। उन बच्चों के लिए कई प्रकार की योजनाएं भी संचालित है। जिसका मुख्य उद्देश्य कठिन परिस्थिति में रहने वाले बच्चों का संरक्षण व सुरक्षा करना है।
इनकी समुचित देखभाल, स्वास्थ्य, सुरक्षा का ध्यान रखना। ऐसे में आवश्यक है कि बाल अधिकारों और संरक्षण से संबंधित गतिविधियों से जुड़े संबंधित अधिकारी, स्वयंसेवी संस्था एवं चाइल्ड हेल्पलाइन के सदस्य आपस में समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि इस दिशा में बेहतर कार्य योजना के साथ कार्य किया जा सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त द्वारा जानकारी दी गई कि बाल श्रम, बाल यौन शोषण, पलायन, ट्रैफिकिंग मानव व्यापार, बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लागने के उदेश्य से प्रोजेक्ट पंछी का शुभारंभ जिले में किया गया है।
प्रोजेक्ट पंछी का मुख्य उदेश्य है, सभी के सहयोग से बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव, हिंसा, बाल मजदूरी, बाल-यौन शोसन, ट्रेफिकिंग एवं बाल मजदूरी पर रोकथाम लगाना। इसके लिए जिले में सभी ग्रामीण बाल संरक्षण समिति को मजबूत एवं सक्रिय बनाने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।
दूसरी ओर बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण संबंधी विषयों पर भी इस दिशा में कार्य योजना बना कर कार्य करते हुए ग्राम स्तर पर बाल श्रम, बाल यौन शोषण, पलायन, ट्रैफिकिंग मानव व्यापार, बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लागने में सक्रिय पहल की जा सके।
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बच्चों को उनका अधिकार व एक नया सवेरा देने की कोशिश प्रोजेक्ट पंछी के माध्यम से की जायेगी। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग के अधिकारी, कर्मी एवं स्वयं सेवी संस्था आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि इस दिशा में बेहतर कार्य किया जा सके।
उपायुक्त ने अभियान से जुड़े सभी स्वयं सस्थाओं का आभार प्रकट किया। बैठक में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन, ग्राम ज्योति, प्रेरणा भारती, प्रवाह, चेतना विकास, नीड्स, क्वेस्ट एलायन्स के अधिकारी के साथ-साथ संबंधित विभाग के अधिकारी, कर्मी आदि उपस्थित थे।
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