सीएफआरआर मामलों में बढ़ोतरी व् लंबित दावा, आपत्ति का पुनः जांच करें-उपायुक्त
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। वन अधिकार पट्टा (फॉरेस्ट राइट्स एक्ट) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा ने बैठक की। बैठक गोपनीय स्थित कार्यालय कक्ष में 13 अक्टूबर को देर संध्या आयोजित की गयी।
बैठक में व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा (आइएफआर) और सामुदायिक वन अधिकार पट्टा (सीएफआर) से संबंधित प्रगति की समीक्षा की गयी। साथ हीं कई महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया। बैठक में कल्याण विभाग के वरीय पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, वन पदाधिकारी संदीप शिंदे, जिला कल्याण पदाधिकारी एन.एस. कुजूर सहित अन्य उपस्थित थे।
बैठक में उपायुक्त झा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) के मामलों में अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करें, ताकि पात्र समुदायों को उनके अधिकार समय पर प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण और वन आश्रित समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। इसके अलावा, उपायुक्त ने कहा कि अनुमंडल एवं जिला समिति द्वारा लंबित दावा – आपत्ति दर्ज किए गए आइएफआर और सीएफआर आवेदनों की पुनः जांच करें, उसका निराकरण कर ग्राम वन समिति के माध्यम से अनुमंडल वन समिति को प्रेषित करें।

ताकि किसी पात्र लाभुक को अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी ऐसे मामलों की निष्पक्षता से समीक्षा कर यथाशीघ्र निराकरण करें। साथ ही उन्होंने सीएसओ को ग्राम सभा से जुड़ने और आवेदन पुनः भेजने हेतु प्रेरित करने का निर्देश दिया। कहा कि, बोकारो झारखंड का पहला ऐसा जिला बने जहां वितरित पट्टा रिकॉर्ड ऑफ राइट्स के रूप में संधारण किया गया हो इस दिशा में कदम उठाने हेतु निर्देशित किया।
बैठक के दौरान पदाधिकारियों को वन अधिकार पट्टा वितरण प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, त्वरित निष्पादन और अंतर-विभागीय समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि वन अधिकार पट्टा केवल भूमि स्वामित्व का विषय नहीं, बल्कि यह समुदायों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से इस दिशा में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने को कहा।
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