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बाल विवाह से गोमिया प्रखंड पूर्णतः मुक्त, जिले के लिए बड़ी उपलब्धि-उपायुक्त

हमारा संकल्प सुरक्षित एवं सशक्त महिला, सशक्त झारखंड का भव्य आयोजन

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। महिला सशक्तिकरण एवं कुप्रथा मुक्त झारखंड के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से झारखंड सरकार की ओर से अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का भव्य आयोजन 6 जनवरी को बोकारो जिला के हद में पेटरवार स्थित प्लस टू हाई स्कूल मैदान में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त सहित उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, उप समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी जगन्नाथ लोहरा, बेरमो अनुमंडल पदाधिकारी मुकेश मछुवा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुमन गुप्ता एवं सुजाता कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर अतिथियों को पौधा एवं फोटोयुक्त प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही उपस्थित आमजनों को बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा के विरुद्ध शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण की लड़ाई वर्ष 1829 में राजा राममोहन राय द्वारा सती प्रथा के विरोध से शुरू की गयी थी, जो आज भी जारी है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि बोकारो जिले का गोमिया प्रखंड अब पूर्ण रूप से बाल विवाह मुक्त हो चुका है, जो जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जब एक प्रखंड बाल विवाह से मुक्त हो सकता है, तो अन्य प्रखंडों में भी थोड़े प्रयास से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

उपायुक्त ने जानकारी दी कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत समाज कल्याण विभाग के निदेशक से लेकर मंडलीय आयुक्त, उपायुक्त, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षक एवं पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। बाल विवाह से संबंधित शिकायतें इन अधिकारियों के पास दर्ज कराई जा सकती हैं।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय पेटरवार के समीप स्थित शराब दुकान का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। बताया गया कि छात्राओं को स्कूल जाते समय शराब दुकान के सामने से गुजरना पड़ता है, जिससे उन्हें असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उपायुक्त ने जांच कर शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में डायन-बिसाही, घरेलू हिंसा, सामाजिक कुरीतियों तथा महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि इसके सामाजिक और शारीरिक दुष्परिणाम भी हैं। इससे बालिकाओं की पढ़ाई बाधित होती है तथा कम उम्र में विवाह से मातृत्व मृत्यु दर और घरेलू हिंसा की आशंका बढ़ जाती है।

कार्यक्रम में सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना की भी जानकारी दी गई। इस अवसर पर बेरमो अनुमंडल के सभी पंचायतों के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, सभी प्रखंडों के बीडीओ, अंचल अधिकारी, शिक्षा पदाधिकारी, बाल कल्याण पदाधिकारी, आंगनबाड़ी पर्यवेक्षक, सेविका-सहायिका सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे।

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