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कबीर मठ में जबरन टंकी निर्माण के खिलाफ जिलाधिकारी से मिला प्रतिनिधिमंडल

अंचलाधिकारी से एनओसी के बगैर संस्था की जमीन पर टंकी निर्माण अवैध-माले

एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। समस्तीपुर जिला के हद में ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र के योगियामठ स्थित कबीर मठ की जमीन पर अवैध पानी टंकी निर्माण के खिलाफ 14 मार्च को भाकपा माले टीम जिलाधिकारी से मिला।

जानकारी के अनुसार खाता पुराना 417, खेसरा 405 एवं रकबा एक कट्ठा 12 धूर में जबरन सरकारी योजना से पानी टंकी निर्माण कर जमीन पर कब्जा जमाने के खिलाफ भाकपा माले के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा से मिलकर पूरे मामले से अवगत कराया और दान से प्राप्त मठ का जमीन का शिकायती आवेदन, भूमि का दस्तावेज एवं अनुदानित दस्तावेज सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में मठ के महंथ भाग्य नारायण दास, भाकपा माले ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार, खेग्रामस जिलाध्यक्ष उपेंद्र राय, सकल साह, ललन कुमार आदि शामिल थे।

इस आशय से संबंधित प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि जिलाधिकारी ने जांच कराकर टंकी निर्माण के दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिम्मदल से उन्होंने कहा है कि किसी भी संस्था की जमीन में संस्था द्वारा आम बैठक से लिखित निर्णय एवं सीओ के एनओसी के बिना कोई भी सरकारी या निजी योजना नहीं चलाया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार न ही मठ के महंथ और न ही सीओ द्वारा एनओसी लिया गया है। ऐसे में पानी टंकी निर्माण अवैध है और भाकपा माले द्वारा मामले की जांचोपरांत निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई की मांग की गयी है। मौके पर मठ के महंथ भाग्यनारायण दास ने कहा कि यह मठ सक्रिय है। चर्चित साहेब एवं बुउआ साहेब के पिता नारायण दास एवं उनकी पत्नी माता साहेब (जमुना माई) का मठ के अंदर समाधि भी है। कहा कि मठ का प्रतिदिन संचालन होता है। खासकर पूर्णिमा के दिन सत्संग एवं भंडारे का आयोजन होता है। कहा कि मठ को खुद जमीन की कमी है। मठ खुद विस्तार की योजना बना रहा है। ऐसी स्थिति में मठ में सरकारी योजना से पानी टंकी लगाकर जमीन एवं मठ पर कब्जा जमाने की साज़िश की जा रही है। साधु-संतों को डराया-धमकाया जा रहा है। यह अनुचित है।

उन्होंने कहा कि ताजपुर के अंचलाधिकारी आरती कुमारी, थानाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा के पास जाने पर भी न्याय नहीं मिला। मजबूरी में जिलाधिकारी के पास जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिलने की पुरी उम्मीद है। अगर फिर भी न्याय नहीं मिलता है तो ताजपुर अंचल कार्यालय पर आमरण अनशन कर साधु-संत जान दे देंगे, लेकिन मठ को खत्म होने नहीं देंगे।

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