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बड़ाजामदा में तीन दिन से अंधेरा, पेयजल संकट गहराया

आंधी से बिजली तार पर गिरा पेड़ ने किया जनजीवन अस्त-व्यस्त

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में बड़ाजामदा में बीते 18 मई की शाम आई तेज आंधी और मूसलधार बारिश ने क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। आंधी के दौरान एक बड़ा पेड़ हाई टेंशन विद्युत तार पर गिर गया, जिससे पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप्प हो गई।

बताया जाता है कि 20 मई की दोपहर तक, लगातार दो दिन गुजरने के बावजूद क्षेत्र में विद्युत बहाली नहीं हो सकी है। इस संकट ने स्थानीय रहिवासियों को अंधेरे और पानी के गंभीर संकट में झोंक दिया है।

बड़ाजामदा क्षेत्र में जल आपूर्ति मुख्यतः जल मीनारों और डीप बोरिंग के समरसेबल पंपों के माध्यम से की जाती है। बिजली गुल होने से पंप पूरी तरह बंद हैं, जिससे घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। तपती गर्मी के बीच रहिवासियों की प्यास बुझाने का कोई जरिया नहीं शेष बचा है।

पेयजल संकट ने यहां के रहिवासियों को प्राकृतिक स्रोतों की ओर मोड़ दिया है। कई रहिवासी रेलवे स्टेशन से पानी भरकर ला रहे हैं तो कुछ वाहन से नदी-नालों से पानी लाकर घरों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। इससे ना केवल समय और श्रम की बर्बादी हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।

बताया जाता है कि बड़ाजामदा क्षेत्र के जिन घरों में इन्वर्टर की सुविधा थी, वह भी अब जवाब दे चुके हैं। दो दिनों से लगातार बिजली नहीं रहने के कारण इन्वर्टर चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। छात्रों की पढ़ाई ठप्प हो गई है, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।

बड़ाजामदा क्षेत्र के स्थानीय रहिवासियों का आरोप है कि बिजली विभाग की ओर से इस संकट को लेकर अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ना तो कोई कर्मचारी मरम्मति स्थल पर पहुंचा है और ना ही किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। बावजूद इसके रहिवासी खुद राहत कार्यों के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। तेज आंधी ने न केवल बिजली व्यवस्था को तहस-नहस किया, बल्कि कई घरों को भी नुकसान पहुंचाया है।

बताया जाता है कि बड़ाजामदा रहिवासी राजेश कुमार चौधरी के घर पर पेड़ की भारी डाली गिर गई, जिससे उनका मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। सौभाग्यवश कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा है। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी रहिवासियों को अखर रही है। इस भीषण संकट में न तो राहत सामग्री पहुंची है, न ही किसी ने हालचाल पूछने की जहमत उठाई है।

रहिवासियों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। बड़ाजामदा के रहिवासी अब प्रशासन से शीघ्र बिजली बहाली और पेयजल आपूर्ति के वैकल्पिक उपाय की मांग कर रहे हैं। कहा गया कि अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।

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