एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कस्तूरबा श्रीविद्या निकेतन ढोरी में 13 दिसंबर को विद्यालय के आचार्यो के लिए संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया गया।
जानकारी के अनुसार उक्त परीक्षा आयोजित करने का उद्देश्य आचार्यो में भारतीय संस्कृति, संस्कारों, गौरवशाली इतिहास और ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता और जुड़ाव पैदा करना है। जिससे उनमें राष्ट्रवाद, नैतिक चेतना, स्वाभिमान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। जो उन्हें अनुशासित, देशभक्त और जिम्मेदार नागरिक बनाएं।
विद्यालय के सचिव धीरज कुमार पांडेय ने आयोजित परीक्षा के विषय में बताते हुए कहा कि इसमें भारतीय विज्ञान, गणित, आयुर्वेद, नक्षत्र विज्ञान और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल किया गया हैं, जिससे ज्ञान की वृद्धि होती है और आचार्य हर विषय से जुड़ पाते हैं। विद्यालय की प्रधानाचार्या रूमी सरकार ने परीक्षा के विषय में बात करते हुए कहा कि संस्कृति और मूल्यों का ज्ञान हमें भारतीय संस्कृति के समृद्ध इतिहास, परंपराओं, पर्वों, तीर्थस्थलों और महापुरुषों के बारे में शिक्षा देता है।
जिससे हम अपनी जड़ों से जुड़ते हैं। विद्यालय के प्रभारी सह परीक्षा प्रमुख ने बताया कि शिक्षकों (आचार्यों) और अभिभावकों के लिए यह परीक्षा एक क्रमिक क्रम में होती है।
प्रथम चरण – प्रवेशिका: यह प्रारंभिक स्तर है। द्वितीय चरण – मध्यमा: प्रवेशिका उत्तीर्ण करने के बाद अगला स्तर। तृतीय चरण – उत्तमा: मध्यमा के बाद का उच्च स्तर तथा चतुर्थ चरण – प्रज्ञा: यह अंतिम और उच्चतम चरण है। प्रज्ञा परीक्षा केवल वही दे सकते हैं, जिन्होंने पहले तीन स्तर (प्रवेशिका, मध्यमा और उत्तमा) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लिए हों।
इस परीक्षा भाग लेने वाले आचार्य में शैलबाला कुमारी, प्रीति प्रेरणा सिंह, संजू ठाकुर, इंद्राणी सिन्हा राय, नंदनी कुमारी, अनिता कुमारी, शिवपूजन सोनी, राहुल मांझी, दीपक कुमार, मंतोष कुमार, सीमा झा, कुमार गौरव, वीणा कुमारी, जय गोविंद प्रमाणिक, राजेंद्र कुमार पांडेय आदि शामिल थे। सभी आचार्यों ने अलग-अलग चरणों के लिए परीक्षाएं दी। परीक्षा का समय एक घंटा निश्चित था। इस परीक्षा में सभी आचार्यों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया और कहा कि ऐसी परीक्षाएं विद्यालय में आयोजित होते रहना चाहिए।
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