एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के राजेंद्र नगर स्थित प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित तीन दिवसीय कला, संस्कृति कार्यक्रम में देश के सात राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है। इंद्रधनुष के माध्यम से एक से बढ़कर एक अद्भुत कला का प्रदर्शन किया जा रहा है।
जानकारी देते हुए कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी मनीष महीवाल ने 31 जनवरी को बताया कि पूर्व क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता द्वारा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज उत्तर प्रदेश, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार तथा कला एवं संस्कृति विभाग बिहार सरकार के सहयोग से बीते 30 जनवरी से एक फरवरी तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव इंद्रधनुष का आयोजन प्रेमचंद रंगशाला राजेंद्र नगर पटना में आयोजित किया जा रहा है।
महीवाल ने बताया कि तापस सामंत रॉय, उप निदेशक पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता तथा राजर्षि चंद्रा सहायक अभियंता पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इस कार्यक्रम का सम्पादन कर रहे हैं। पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईजेडसीसी) कोलकाता, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के तहत भारत सरकार द्वारा स्थापित सात ऐसे क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सांस्कृतिक रूप से एकीकृत करना है। इस केंद्र के अंतर्गत असम, बिहार, झारखंड, मणिपुर, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल है।
उन्होंने बताया कि 31 जनवरी को शाम 5:30 बजे दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन के बाद रंजना झा एवं समूह द्वारा लोकगीत गायन से कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया। इसके बाद बिहार का रंग सेतु पटना द्वारा लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके उपरान्त पारंपरिक वेशभूषा प्रदर्शन किया गया, जिसमे कलाकार विभिन्न राज्यों के स्थानीय परिधानों में मंच पर पहुंचे। इसके बाद साकार कलाकृति पटना तथा दीपक एवं समूह भागलपुर द्वारा बिहार का लोकनृत्य प्रदर्शित किया गया। अंत में सातों राज्यों के कलाकारों की कोरियोग्राफिक की प्रस्तुति की गई, जिसे बिहार के युवा कोरियोग्राफर राजीव कुमार रॉय ने तैयार करवाया था।
महीवाल के अनुसार इंद्रधनुष में लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति की गयी। प्रेमचंद रंगशाला के बाह्य परिसर में पारंपरिक शिल्प मेला, कलाकार चित्रकला कार्यशाला एवं खान- पान मेला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्थानीय सहयोग के लिए लोक पंच के कलाकार, कलाप्रेमी दर्शक आदि उपस्थित थे। बताया कि एक फरवरी को समापन दिवस पर बिहार के लोकगीत एवं लोकनृत्य, सात राज्यों के लोक कलाकारों द्वारा कोरियोग्राफिक प्रस्तुति: इंद्रधनुष तथा पारंपरिक वेशभूषा प्रदर्शन किया जायेगा।
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