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कल से दो दिन रहेगी बोकारो में मिथिलांचल की सांस्कृतिक छटा

कलाकार प्रिया मल्लिक, रामबाबू झा और माधव राय अपने गीतों से बांधेंगे समां

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। इस्पातनगरी बोकारो में एक बार फिर मिथिलांचल की पारंपरिक, कलात्मक और सांस्कृतिक छटा उतरने जा रही है।

मिथिला-मैथिलों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद बोकारो की ओर से परिषद संचालित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल सेक्टर 4ई परिसर में 8-9 नवंबर को आयोजित दो दिवसीय 58वें विद्यापति स्मृति पर्व समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में है।

परिषद के महासचिव नीरज चौधरी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक ने 6 नवंबर को संयुक्त रूप से बताया कि दो दिनों के इस वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव में गीत-संगीत, नृत्य सहित विभिन्न मनोरंजक कार्यक्रमों की झड़ी लगी रहेगी। बताया कि कार्यक्रम के पहले दिन 8 नवंबर की संध्या साढ़े सात बजे उद्घाटन समारोह में कई गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में बाहर से आमंत्रित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के लब्ध प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे।

जानी-मानी गायिका प्रिया मल्लिक, मैथिली के सुविख्यात लोकगीत कलाकार रामबाबू झा और माधव राय की प्रस्तुतियां खास होंगी। अपनी-अपनी विशिष्ट शैली की गायकी से तीनों आमंत्रित कलाकार समारोह में समां बांधेंगे। उपरोक्त द्वारा कहा गया कि वीडियो संदेश में उक्त कलाकारों ने अधिकाधिक माथिली भाषा भाषी से समारोह में उपस्थित होकर उनके गीतों का आनंद लेने की अपील की है। कहा गया कि देश की राजधानी दिल्ली से आमंत्रित जाने-माने उद्घोषक राजीव कुमार झा पहले दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन करेंगे।

बताया गया कि कार्यक्रम के दूसरे दिन 9 नवंबर को स्थानीय कलाकारों के गायन तथा महिलाओं की समूह-गान प्रस्तुति के साथ मैथिली नाटक बड्ड मुश्किल छै का मंचन विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा। रौशन झा द्वारा लिखित एवं वरिष्ठ रंगकर्मी शंभु झा द्वारा निर्देशित इस नाटक में आज की सामाजिक अवमूल्यन संबंधी परिस्थितियों का जीवंत मंचन किया जाएगा। अपनी संस्कृति और माटी से पलायन के सामाजिक दुष्प्रभाव तथा परिवार के पतन को कलाकार अपने अभिनय कौशल से प्रदर्शित करेंगे। नाटक कलाकारों में पम्मी झा, प्रीति मिश्रा, सुमन मिश्रा, प्रीति प्रिया, चंद्रकांत मिश्रा, शंभु झा, मयंक कुमार मिश्रा, गिरिजानंद मिश्र, रमण कुमार ठाकुर और देवाशीष कुमार मल्लिक शामिल रहेंगे।

महासचिव चौधरी ने कहा कि विद्यापति स्मृति पर्व समारोह अपने गांव से दूर परदेस में मिथिलावासियों के समागम का अनुपम अवसर है। यह खासकर नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़े रखने में काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकाधिक जनों से इस कार्यक्रम में शामिल होकर समारोह को ऐतिहासिक बनाने में सहयोग की अपील की है।

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