प्रहरी संवाददाता/हाजीपुर (वैशाली)। जम्मू कश्मीर के उड़ी सेक्टर में अपने कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए जवान रमेश कुमार का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर बीते 26 जनवरी को वैशाली जिला के हद में सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के उनके गांव मुरोबतपुर पहुंचा।
ज्ञात हो कि शहीद जवान रमेश के शहादत की खबर मिलते ही मुरौवतपुर गांव समेत पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तिरंगे में लिपटे शव के अंतिम दर्शन के लिए भारी जन सैलाब उमड़ पड़ा।
शहीद रमेश कुमार स्वर्गीय राम इकबाल राय एवं स्वर्गीय मन्ती देवी के पुत्र थे। वे राष्ट्रीय राइफल्स की 62 आरआर बटालियन में नायक के पद पर तैनात थे। उन्होंने वर्ष 2013 में राष्ट्रीय राइफल्स ज्वाइन किया था और उनका प्रशिक्षण रुड़की में हुआ था। वर्तमान में वे जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में देश सेवा में तैनात थे, जहां ड्यूटी के दौरान उन्होंने मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
शहीद रमेश नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। शहादत की सूचना दूरभाष के माध्यम से जैसे ही परिजनों को मिली, घर में कोहराम मच गया। पत्नी प्रियंका देवी, बड़े भाई विनोद राय सहित अन्य स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद अपने पीछे पत्नी के अलावा 10 वर्षीय पुत्र ईशान और 8 वर्षीय पुत्री इशानी को छोड़ गए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, रमेश करीब छह माह पूर्व अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए घर आए थे। तब किसी ने नहीं सोचा था कि वही मुलाकात उनकी आखिरी होगी। शव यात्रा के दौरान ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद रमेश कुमार अमर रहें और भारत माता की जय के गगनभेदी नारे लगाए। पूरा गांव गमगीन माहौल में डूबा रहा, लेकिन हर चेहरे पर देश के लिए बलिदान देने वाले वीर सपूत पर गर्व भी साफ झलक रहा था।
शहिद के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार महानार के गंगा घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। शहिद के 10 वर्षीय पुत्र द्वारा मुखाग्नि दिए जाने के बाद वहां का माहौल गमगीन हो गया और उपस्थित जन अमर जवान अमर रहेगा का नारा लगाते रहे।
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