ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। झारखंड (Jharkhand) मेंं इलाज की लचर एवं अपर्याप्त व्यवस्था का उल्लेख करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Indian community party) के राज्य कार्य समिति सदस्य तथा झारखंड आंदोलनकारी इफ्तेखार महमूद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजा है। पत्र में उल्लेख किया है कि करीब 4 करोड़ की आबादी वाला झारखंड में महामारी से निपटने की बात तो दूर, 0.5 प्रतिशत लोगों का भी इलाज का व्यवस्था नहीं है। परिणाम स्वरूप इलाज के अभाव में लोगों की मृत्यु हो रही है।
भाकपा नेता महमूद ने उल्लेख करते हुए कहा है कि पलामू के सतबरवा निवासी पारस साहू पिता वीरेंद्र साहू उम्र 40 वर्ष, ग्राम तिलैया टांड(चंदवा) जिला लातेहार निवासी 50 वर्षीय मो. इफ्तेखार, पेटरवार जिला बोकारो निवासी रतनलाल स्वर्णकार, ग्राम चितू विश्रामपुर (नगर उंटारी) जिला गढ़वा निवासी 32 वर्षीय सुग्रीम राम पिता मनोबी राम को इलाज के इन्तजार में ही मृत्यु हो गई। बिहार के पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद स्वर्गीय जोरावर राम का डालटेनगंज सदर अस्पताल में इलाज के लिए घंटों इंतजार में रहने के बाद मृत्यु हो गई। महमूद ने कहा कि हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, गुमला, जामताड़ा सहित झारखंड के करीब सारे इलाके के ग्रामीण क्षेत्र में वायरल बुखार/टाइफाइड का भारी प्रकोप चल रहा है। मोहल्ला का मोहल्ला बुखार से पीड़ित है। इस प्रकोप को झोलाछाप डॉक्टरों ने संभाल रखा है। झोलाछाप डॉक्टर जो अवैध है, यदि सक्रिय नहीं रहते तो राज्य में भारी त्रासदी उत्पन्न हो जाती।
उन्होंने कहा कि राज्य की 76 प्रतिशत आबादी जो ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, इलाज की सरकारी और कानूनी सुविधा से वंचित है। महमूद ने मुख्यमंत्री से कहा है कि राज्य में चिकित्सकों एवं स्वस्थकर्मियों की भारी अभाव को खत्म किया जाए। जब तक कोरोना का कहर खत्म नहीं हो जाता है, तब तक झोलाछाप डॉक्टरों को उपयोग में लाने का कानूनी व्यवस्था किया जाए। घर में पड़े मरीजों को भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का कानूनी प्रावधान किया जाए, क्योंकि अभी तक के नियम के अनुसार जो मरीज लाचारी से अस्पताल नहीं पहुंच पाते है- वैसे मरीज इलाज से महरूम रह जाते हैं। महमूद ने चिकित्सा व्यवस्था को नियंत्रित- निर्देशित करने, जरूरतमंदों को इलाज की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को जिला एवं अनुमंडल स्तर पर प्रबंधक के रूप में नियुक्त करने का भी मांग किया है। उन्होंने संपूर्ण आबादी को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पोलैंड माॅडल को अपनाने का सुझाव दिया है।
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