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भ्रष्ट आईएएस को निलंबन मुक्त नहीं बर्खास्त करना होगा-विजय शंकर नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के भ्रष्ट आईएएस अधिकारियों को सुधारने के लिए निलंबन मुक्त नहीं उन्हें सेवा से बर्खास्त करना होगा। इसके बाद ही झारखंड भ्रष्टाचार मुक्त हो सकेगा।

उपरोक्त बातें 22 जनवरी को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने आईएएस पदाधिकारी पूजा सिंघल को निलंबन समीक्षा समिति के अनुशंसा पर सरकार ने निलंबन मुक्त किये जाने पर प्रतिक्रिया में कही। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपी आईएएस पूजा सिंघल को निलंबन मुक्त किए जाने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा जो राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।

नायक ने कहा कि वर्ष 2000 बैच की आईएएस अधिकारी व् तत्कालीन खान सचिव पूजा सिंघल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 12 मई 2022 को गिरफ्तार किया था।पूजा सिंघल को ईडी ने मनरेगा घोटाले की जांच के दौरान उन पर शिकंजा कसा था। ईडी का आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध धन अर्जित किया। इस मामले में ईडी ने पूजा सिंघल के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान करोड़ों रुपये नकद बरामद हुए थे।

नायक ने कहा कि झारखंड की राजधानी रांची से सटे खूंटी जिले की डिप्‍टी कमिश्‍नर रहने के दौरान उन पर मनरेगा फंड से 18 करोड़ की हेराफेरी के आरोप लगे। जब वह चतरा की डिप्‍टी कमिश्‍नर रहीं, तो यहां भी उनके खिलाफ इसी तरह के आरोप लगे। यहां भी उन पर 4 करोड़ रुपये के मनरेगा फंड में गड़बड़ी के आरोप लगे। पलामू में भी उन पर खदानों के लिए नियमों में ढील देकर जमीन आवंटित करने के आरोप लगे थे।

उन्होंने कहा कि पूजा सिंघल ने भारत नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 479 के तहत जमानत मांगी है। इस धारा के अनुसार, अगर किसी आरोपी का यह पहला अपराध है और उसने अधिकतम सजा का एक तिहाई हिस्सा जेल में बिता लिया है, तो वह जमानत का हकदार है। पूजा सिंघल ने जेल से ही बंदी पत्र लिखकर यह याचिका दायर की थी। मगर उनका यह पहला अपराध नही था, जबकि जेल के बजाय वे ज्यादातर समय रांची के एक अस्पताल में बिताया था और सुप्रीम कोर्ट ने उनके जमानत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक असाधारण मामला है। तब फिर बीएनएस के आधार पर पीएमएलए कोर्ट ने कैसे जमानत दिया।

नायक ने हेमंत सोरेन सरकार और कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग से मांग किया कि ये जब तक मनी लॉन्ड्रिंग के केस व् अन्य भ्रष्टाचार के आरोप से बरी नहीं हो जाती है, तब तक इन्हे राज्य के कोई भी महत्वपूर्ण विभाग नही सौपें जाय। इन्हे अकार्य जैसे पद ही दिये जाय, ताकि फिर से ये भ्रष्टाचार नहीं कर सके।

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