विजय कुमार साव/गोमियां (बोकारो)। लगातार पलायन की भेंट चढ़ता जा रहा है झारखंड का प्रवासी मजदूर। प्रवासी मजदूरों के मौत का सिलसिला जारी है। मृत्यु के बाद सरकार से शव लाने की गुहार लगाई जा रही है।
झारखंड के प्रवासी मजदूरों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। झारखंड के बोकारो, हजारीबाग एवं गिरिडीह जिले में एक के बाद एक लगातार हो रही प्रवासी मजदूरों की मौत का शिलशिला थम नहीं रहा हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार झारखंड से चैन्नई कमाने गये बोकारो जिला के हद में गोमियां प्रखंड के चतरोचट्टी थाना के हद में चिलगो गांव रहिवासी श्यामलाल महतो के 50 वर्षीय पुत्र दिलीप कुमार महतो की चैन्नई के टाली होसूर में काम के दौरान बीते 10 मार्च की शाम सात बजे हृदय गति रूकने से मौत हो गयी।
मौत की खबर लगते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक घर का एकलौता कमाऊ व्यक्ति था। वह अपने पीछे पत्नी मंजरी देवी, पुत्री डोली कुमारी (20 वर्ष) व पुत्र नरेश कुमार (25 वर्ष) को अपने पीछे छोड़ गया।
बताया जाता है कि मृतक दिलीप तमिलनाडु के चैन्नई में एवीएस कंपनी में हाइवा ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। विपत्ति के घड़ी में बेबस पत्नी मंजरी देवी ने अपने पति का शव मुआवजे के साथ लाने के लिए सरकार से मदद की गुहार लगाई हैं।
वहीं इस घटना को लेकर प्रवासी मजदूरों के हितार्थ कार्य करने वाले समाजसेवी सिकन्दर अली ने संवेदना प्रकट करते हुए कहा है कि झारखंड के नौजवानों की मौत के मुंह में समाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई मजदूरों की मौत हो चुकी है।
सरकार मजदूर हित में कुछ पहल नहीं कर रही है और झारखंड से मजदूरों का पलायन तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि मृतक का शव चैन्नई से उनके पैतृक गांव लाने के लिए उनके द्वारा हरसंभव मदद करने का प्रयास किया जा रहा है।
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