Advertisement

आरक्षण रोटेशन से अनुसूचित जाति का हक छीनना हाशिये पर धकेलने की साजिश-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। मेयर आरक्षण रोटेशन से अनुसूचित जाति का हक छीना, अब मात्र दो सीट हेमंत सरकार पर एससी समुदाय को हाशिये पर धकेलने की साजिश, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

रांची नगर निगम चुनाव के नए आरक्षण ढांचे में अनुसूचित जाति एससी समुदाय के लिए मात्र दो सीटें निर्धारित किए जाने के फैसले ने अनुसूचित जाति समाज को झकझोर कर रख दिया है। आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने झारखंड सरकार के इस फैसले को दलित समाज के साथ खुला अन्याय, लोकतंत्र में समान प्रतिनिधित्व के रीढ़ पर प्रहार और संवैधानिक मूल्यों का सीधा अपमान करार दिया है।

नायक ने 20 दिसंबर को कड़े शब्दों में कहा की रांची जैसी राजधानी में एससी समुदाय को केवल दो सीट देकर राज्य की हेमंत सरकार यह साबित कर रही है कि सामाजिक न्याय उनके लिए सिर्फ भाषण का मुद्दा है, हकीकत में नहीं। यह फैसला लोकतंत्र, समान प्रतिनिधित्व और संविधान की आत्मा को ठेस पहुंचाता है। कहा कि स्थानीय निकायों में आरक्षण का सिद्धांत जनसंख्या अनुपात और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तय होना चाहिए, लेकिन रांची जैसे बड़े नगर निगम में केवल दो सीट आरक्षित करना यह सिद्ध करता है कि सत्ता पक्ष आरक्षण को केवल औपचारिकता बना देना चाहता है।

उन्होंने कहा कि पिछले आरक्षण चक्रों में एससी समुदाय को रांची नगर निगम के मेयर सीट को आरक्षित किया गया था, जिसे हेमंत सरकार ने बदल कर एससी समुदाय के हक को छिना है। अब मात्र दो सीट का आरक्षण तक सीमित कर देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। कहा कि क्या यह जनसंख्या आधारित नहीं बल्कि राजनीतिक गणित आधारित आरक्षण है? क्या यह किसी विशेष वर्ग को कमजोर करने की रणनीति है? हेमंत सरकार को इसका जवाब देना होगा।

नायक ने कहा कि यह फैसला सिर्फ दो सीटों का मामला नहीं है, यह पूरे समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने की कोशिश है। यह लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक न्याय के साथ छल है, जो कदापि स्वीकार नही किया जायेगा। कहा कि एससी मेयर सीट का आरक्षण खत्म किया गया। अब सिर्फ दो सीट! यह बदलाव नहीं, एससी समुदाय को कमजोर करने की चाल है। अब यह अन्याय स्वीकार नहीं किया जायेगा।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस अन्यायपूर्ण निर्णय में सुधार नहीं किया गया तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करेगा और इसका बड़ा सामाजिक-राजनीतिक विरोध होगा। यह एक राजनीतिक सौदेबाजी नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। यह व्यवस्था अनुसूचित जाति समुदाय के साथ अन्याय ही नहीं, बल्कि उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का अपमान है।

उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार जनसंख्या के अनुपात की उपेक्षा की जाएगी, तो स्थानीय शासन में कमजोर वर्गों की आवाज़ हमेशा दबेगी और रांची जैसी महानगर में सामाजिक न्याय का वास्तविक मायने खो जाएगा। कहा कि अनुसूचित जाति समाज का योगदान केवल मतदाता तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम की नीतियों, विकास योजनाओं और निर्णयों में भी उनकी भागीदारी अनिवार्य है। ऐसे में सीटों की संख्या घटाकर उनके अधिकारों का हनन करना संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समानता की भावना का अपमान है।

आदिवासी मुलवासी केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कहा कि एससी समुदाय को हाशिये पर धकेलने की कोई कोशिश कामयाब नहीं होने दी जाएगी। यह फैसला बदले बिना लोकतांत्रिक ईमानदारी साबित नहीं हो सकती। कहा कि अनुच्छेद 243-T स्पष्ट रूप से कहता है कि स्थानीय निकायों में एससी/एसटी समुदाय को उनकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। राजधानी रांची की वास्तविक जनसंख्या के अनुपात के मुकाबले मात्र दो सीट देना सीधे-सीधे संवैधानिक भावना के विपरीत है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। आरक्षण की इस संरचना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो इसे जन आंदोलन और न्यायिक लड़ाई में भी बदला जाएगा। हमारी मांग आरक्षण व्यवस्था की पुनर्समीक्षा, जनसंख्या आधारित वास्तविक गणना, पारदर्शी और निष्पक्ष आरक्षण मॉडल जारी करने की है, जिसे पूरा करना होगा। नही तो अनुसूचित जाति नगर निगम चुनाव में वोट बहिष्कार का फैसला लेगा

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *