एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के जगन्नाथपुर में बीते 24 दिसंबर की देर संध्या सिद्धि समारोह का आयोजन कर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में सीसीआरटी तथा जेसीईआरटी के पदाधिकारीगण शामिल हुए।
सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) नई दिल्ली (संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार) एवं जेसीईआरटी रांची (झारखंड) के संयुक्त तत्वावधान में बीते 19 से 24 दिसंबर तक झारखंड के रांची स्थित टीवीएस मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय जगन्नाथपुर में पाठ्यक्रम शिक्षण में सांस्कृतिक तत्व विषय पर एक लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 84 शिक्षक/शिक्षिकाओं ने भाग लिया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य समापन सिद्धि समारोह के साथ संपन्न हो गया। यह कार्यक्रम शिक्षा क्षेत्र में सांस्कृतिक संसाधनों को एकीकृत करने, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नवीन शिक्षण पद्धतियों पर केंद्रित था।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक, जेसीईआरटी राँची शशि रंजन, विशिष्ट अतिथि उप निदेशक, सीसीआरटी नई दिल्ली डॉ राहुल कुमार के अलावा अतिथियों में उपनिदेशक, जेसीईआरटी विन्ध्याचल पांडेय, तथा जिला शिक्षा अधीक्षक रांची बादल राज ने उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शशि रंजन ने अपने संबोधन में सीसीआरटी के पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एवं धरती आवा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, जनजातीय गौरव दिवस के अवसर को समर्पित है। कहा कि इस प्रशिक्षण से राज्य के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अपने शिक्षण में फायदा होगा।
इस पहल के लिए उन्होंने उपनिदेशक डा.राहुल कुमार की भी सराहना की। साथ हीं प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों को शिक्षा में समाहित करना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को साधुवाद देते हुए आगे भी ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ राहुल कुमार ने सीसीआरटी की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि कैसे सांस्कृतिक संसाधनों का उपयोग शिक्षण को अधिक रोचक और प्रभावी बनाता है। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। विन्ध्याचल पांडेय और बादल राज ने भी यहां अपने विचार व्यक्त किए तथा जिला स्तर पर इस प्रशिक्षण के क्रियान्वयन पर बल दिया। सिद्धि समारोह में शिक्षक प्रतिभागियों द्वारा पाठ योजना ,क्राफ्ट ,पेंटिंग आदि का प्रदर्शन किया गया।

वहीं 3 दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागिता कर रहे 600 बच्चों के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा सीखे गए वन्दे मातरम् विषय पर आधारित विभिन्न भारतीय भाषाओं के गीत के साथ वन्दे मातरम् गीत गायन, अभिनय, लोक नृत्य (पुरूलिया छऊ), सौरा चित्रकला, पेपर क्राफ्ट , मिट्टी का कार्य, चाक पर बर्तन बनाने, चित्रकला के माध्यम से कहानी कहने जैसी विविध कलाओं को जो बच्चों द्वारा सीखे गए थे उन कार्यों का प्रदर्शन भी किया गया।
आज के सिद्धि समारोह में बच्चों द्वारा वन्दे मातरम्, थियेटर एवं छउ नृत्य की विहंगम प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी शिक्षकों एवं बच्चों के बीच प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। यह कार्यक्रम शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। यहां सीसीआरटी क्षेत्राधिकारी मिथुन दत्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। जबकि, कार्यक्रम का संचालन डीआरपी, सीसीआरटी अजय कुमार ठाकुर ने किया। वहीं राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की गई।
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