एस. पी. सक्सेना/बोकारो। भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश के मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक होते जा रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा मॉब लिंचिंग की घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यह घटना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह वहां कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को भी उजागर करती है।
बंगलादेश की हृदय विदारक घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 23 दिसंबर को यूनाइटेड मिल्ली फोरम के झारखंड प्रदेश महासचिव अफजल अनीस ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में इस तरह की हिंसा की कोई जगह नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा किसी भी लोकतांत्रिक देश की बुनियादी जिम्मेदारी होती है, लेकिन बांग्लादेश में लगातार हो रही घटनाएं यह दर्शाती हैं कि वहां अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
अफजल अनीस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की हैं। साथ हीं कहा कि हिंसा के खिलाफ बांग्लादेश सरकार तत्काल सख्त कदम उठाए। दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा दे और देश में कानून का शासन पूरी तरह बहाल करे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी इस मामले में संज्ञान लेने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में कानून का शासन बहाल हो और वहां के अल्पसंख्यक सुरक्षित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म या समुदाय के आधार पर किसी के साथ हिंसा पूरी मानवता के खिलाफ अपराध है, जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। कहा कि यूनाइटेड मिल्ली फोरम झारखंड प्रदेश कमिटी बंगलादेश में अल्पसंख्यको के साथ घटित घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए शांति, सौहार्द और मानवाधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर देता है।
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