सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। ठंड के लिए दूसरी कश्मीर माने जाने वाले झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र में ठंड ने दिसम्बर महीने के आगमन के साथ ही कोहराम मचानी शुरू कर दी है। यहां का पारा लुढ़ककर 7 डिग्री तक पहुंच गया है।
सारंडा वन क्षेत्र के ग्रामीण रहिवासी अपने स्तर पर ठंड से राहत के लिए जगह जगह अलाव जला रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि चूंकि इस समय सारंडा में ठंड परवान चढ कर बोल रही है। बाबजूद इसके जिला व् प्रखंड प्रशासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था नहीं कराई गई है, जिससे ग्रामीण परेशान हैं। रहिवासी खुद जंगल जाकर अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था कर अलाव जला रहे हैं।

बता दें कि पिछले वर्ष अत्यधिक ठंड और प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को जलावन के लिए लकड़ी मुहैया नहीं कराने से ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार ग्रामीणों की जान चली गई थी। ग्रामीणों ने प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड को देखते हुए जल्द जलावन के लिए लकड़ी मुहैया कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की ओर से अगर एक दो दिनों के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों में अलाव के लकड़ी मुहैया नहीं कराई जाती है, तो ठंड से गरीब निर्धनों की जान जाने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
उक्त तथ्यों को अनुसूचित जनजाति भाजपा नेता एवं नोवामुंडी भाग- एक पूर्व जिला पार्षद शंभू पासवान ने कहा कि इस बार प्रशासन की ओर से अभी तक अलाव के लिए लकड़ी के साथ गरीब निर्धनों के बीच प्रशासन की ओर से गर्म वस्त्रों का भी वितरण नहीं की गई है, जिससे ग्रामीण चिंतित और परेशान दिख रहे है। शंभू पासवान ने जिला प्रशासन को ध्यानाकृष्ट करते हुए गरीबों के राहत हेतु अलाव की व्यवस्था के लिए लकड़ी के साथ-साथ कंबल वितरण कार्यक्रम के आयोजन की अपील की है।
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