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सत्तर वर्षों से शरणार्थी का जीवन जी रहे विस्थापित, केंद्र ले संज्ञान-सांसद

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। गिरिडीह सांसद ने लोकसभा में झारखंड के बोकारो थर्मल, मैथन बांध और कोनार बांध परियोजना के विस्थापितों की समस्या उठायी।

जानकारी के अनुसार सांसद ने लोकसभा में बोकारो थर्मल, मैथन बांध और कोनार बांध परियोजना से संबंधित विस्थापितों की समस्याएं उठायी। उन्होंने 377 नियम के अधीन सूचना के तहत केंद्र सरकार और विद्युत मंत्रालय से ऐसे विस्थापितों की समस्याओं पर संज्ञान लेने की मांग की है।

कहा कि कहने को तो विस्थापितों को पुनर्वासित कर दिया गया है। आलम यह है कि विस्थापितों को केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिलना दूर की बात है, अब राज्य सरकार भी इन्हें विस्थापित नहीं मानती है। उन्होंने ऐसे प्रभावितो के नाम से आवंटित भूमि का म्यूटेशन करने, प्रत्येक पुनर्वासित परिवार को प्रमाण पत्र देने, प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार देने का प्रावधान करने, विस्थापित गांवों में बिजली, पेयजल व अन्य बुनियादी सुविधाएं सहित आय बढ़ाने वाली योजनाओं का लाभ देने की मांग की है।

सांसद ने कहा कि डीवीसी ने वर्ष 1950-51 में बोकारो थर्मल, मैथन बांध और कोनार बांध परियोजना के लिए ग्रामीणों को विस्थापित कर नई बस्ती, नावाटांड़, लुईआडीह, भुरसा, कैसरकरल गांव में बसा दिया। डीवीसी ने ऐसे दस्तावेजों के साथ बसाया है, जिन्हें राज्य सरकार ने पिछले भूमि सर्वेक्षण के दौरान स्वीकार नहीं किया।

इसलिए पुनर्वासित ऐसी भूमि पर रह रहे हैं जो दूसरों, वन, डीवीसी आदि के नाम पर दर्ज है। इन्हें इस जमीन पर मालिकाना हक नहीं मिलने के कारण केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पुनर्वासितों ने डीवीसी जैसी केंद्र सरकार की सार्वजनिक परियोजना के निर्माण के कारण अपनी पैतृक संपत्ति खो दी और भूमिहीन हो गए। सांसद प्रतिनिधि सह विस्थापित नेता जितेन्द्र यादव, दीपक महतो, जलेश्वर् महतो उर्फ जेलू ने इसके लिए सांसद को साधुवाद दिया है।

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