एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के मुख्यमंत्री चुनाव घोषणा से पूर्व कम से कम सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों, महिला आयोग में अध्यक्ष, अनुसूचित जाति आयोग में अध्यक्ष, मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष का तो मनोनयन कर ही दें।
उक्त बाते 23 सितंबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईमेल भेजकर कही। नायक ने सीएम का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि बीते 4 वर्षो से अधिक दिनों तक सूचना आयुक्तों का मनोनयन नहीं होने से झारखंड में सूचना अधिकार कानून पूर्ण रूप से मृतप्राय हो गया है। राज्य के सभी विभागों के जन सूचना पदाधिकारी आम जनता को सूचना नहीं देने का कार्य कर रहे है। राज्य में जन सूचना अधिकार ठप्प हो गया है।
नायक ने कहा कि इसी क्रम में महिला आयोग में भी विगत 5 वर्षो से आयोग का अध्यक्ष नहीं रहने के कारण राज्य के उत्पीड़ित, शोषित, हिंसा की शिकार महिलाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण महिलाओ के साथ अत्याचार, व्याभिचार, शोषण तथा उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इसलिए राज्यहित में महिला आयोग में अध्यक्ष का मनोनयन आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है, ताकि महिलाओं को समय से न्याय मिल सके।
नायक ने ईमेल में कहा है कि अनुसूचित जाति आयोग मे भी लगभग 5 वर्षो से अध्यक्ष का पद रिक्त है। इसके कारण राज्य के अनुसूचित जाति समाज पर राज्य भर मे उत्पीड़िन, शोषण, जातीय हिंसा, छुआछूत के शिकार हुए वर्गो को न्याय नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण दलित वर्ग में अत्याचार, व्याभिचार, शोषण उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
उसी तरह मानवाधिकार आयोग मे भी अध्यक्ष नही रहने के कारण मानवाधिकार कानूनो का घोर उल्लंघन हो रहा है। इसलिए किन्तु-परन्तु ना करते हुए राज्य की जनता से प्रत्यक्ष रुप से जुड़े उपरोक्त आयोगो मे चुनाव आचार संहिता लागु होने से पूर्व अध्यक्षो का मनोनयन कर दिया जाय।
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