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सीटू ने केंद्र सरकार के चार श्रम संहिताओं को किया खारिज

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। केंद्रीय श्रम संगठन सीटू से संबद्ध इस्पात मजदूर मोर्चा की ओर से 29 दिसंबर को सेल के बोकारो आरएमएचपी कैंटीन रेस्ट रूम में मजदूर सभा का आयोजन किया गया।

आयोजित मजदूर सभा को संबोधित करते हुए युनियन के सचिव इश्तियाक अंसारी ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में चार श्रम संहिताओं को मजदूर समर्थक और आधुनिकीकरण के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया है, जबकि वास्तव में वे आजादी के बाद से मजदूरों के कड़े संघर्षों से हासिल अधिकारों और हकों का सबसे व्यापक और आक्रामक हनन हैं, जिसका मकसद काॅरपोरेट के शोषण, ठेकेदारी और अनियंत्रित नियुक्ति और बर्खास्तगी को सुविधाजनक बनाना है।

उन्होंने कहा कि देश का सर्वोच्च त्रिपक्षीय अधिकारिक मंच भारतीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी) ट्रेड यूनियनों के लगातार आग्रह के बावजूद पिछले दस वर्षों से नहीं बुलाया गया है। सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने हर परामर्श में ठोस और अकाट्य तर्कों और दस्तावेजी प्रमाणों के साथ इन संहिताओं का सर्वसम्मति से विरोध किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाई गई हर बड़ी आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया। विपक्ष की उपस्थिति के बिना ही इन संहिताओं को संसद में पारित कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मखौल उड़ाया गया है।

उन्होंने कहा कि चारों श्रम संहिता काॅरपोरेट घरानो द्वारा संचालित श्रम बाजार विनियमन का एक साधन हैं, जिनका मकसद नौकरी की सुरक्षा को नष्ट करना, हड़ताल के अधिकार का दमन, श्रम निरीक्षण को खत्म करना, ठेकेदारी और निश्चित अवधि के रोजगार का विस्तार करना, यूनियनों और सामूहिक सौदेबाजी को कमजोर करना और सामाजिक सुरक्षा को प्रतीकात्मक योजनाओं तक सीमित करना है। इन सभी का मकसद श्रम लागत को न्यूनतम करने और श्रम अधिकारों को खत्म करने का एक साजिश है।

कोषाध्यक्ष देव कुमार ने कहा कि सीटू की सभी चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने की मांग के साथ ही सीटू भारत के मजदूर वर्ग से आह्वान करता है कि वे केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के एकजुट आह्वान में शामिल हों और क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर जुझारू एकजुट संघर्ष के माध्यम से ऐसे क्रूर जनविरोधी कदमों का डटकर विरोध करें तथा सामूहिक रूप से उन अधिकारों पर जोर दें, जिन्हें छीनने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का मजदूर वर्ग पहले भी मजदूर विरोधी नीतियों से लड़कर उन्हें पराजित कर चुका है और वह फिर से ऐसा ही करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेश साव व संचालन संजय अंबेडकर ने किया।

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