रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार अंचल के रैयत इन दिनों पशोपेश में हैं। कारण यह कि ऑनलाइन रसीद नहीं रहने के कारण अंचल कार्यालय द्वारा रैयतों को भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है।
ज्ञात हो कि कसमार अंचल के हद में भारतमाला परियोजना फेज दो वाराणसी से कोलकता तक एक्सप्रेस वे सिक्स लेन तथा बरलंगा से कसमार भाया नेमरा सड़क निर्माण चौड़ीकरण को ले भूमि अधिग्रहण के एवज में ऑनलाइन रसीद नहीं होने पर कसमार अंचल द्वारा भू- स्वामित्व प्रमाण पत्र पर फारवर्ड नहीं करने की शिकायत कई मौजा के रैयतों ने किया है।
इस संबंध में एक जनवरी को प्रभावित रैयतों ने बताया कि ऑनलाइन रसीद नहीं रहने पर भू स्वामित्व प्रमाण पत्र नहीं दिए जाने के कारण सड़क निर्माण में अधिग्रहित भूमि के एवज में मिलने वाला राशि ससमय नहीं मिल पाएगा। इतना ही नहीं खतियानी जमीन का भी ऑनलाइन रसीद नहीं है तो आगे काम नहीं होगा।
इस संबंध में कसमार के अंचलाधिकारी (सीओ) सुरेश कुमार सिन्हा ने बताया कि रजिस्टर टू के खाते में प्लाॅट पहले से ही बहुत का नहीं है, ऐसे में पहले का मैनुअल रसीद हो तो लाने से उसके आधार पर भू स्वामित्व प्रमाण पत्र रैयतों को दिया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक भू-अर्जन विभाग द्वारा खतियान के आधार पर नोटिस दिया गया, जबकि खतियान धारी ज़मीन बेच चुका है। खरीदारी वालों का नोटिस नहीं निर्गत होने के कारण खरीदारी करने वाले ज़मीन मालिक विरोध कर रहे है। विभाग द्वारा भुगतान होने के बाद ही सड़क निर्माण कार्य होना चाहिए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
इसके लिए भू-अर्जन विभाग को अंचल द्वारा ज़मीन के कागजात की मांग कर ही नोटिस करने की जरुरत थी। लेकिन ऐसा भु-अर्जन विभाग द्वारा नहीं किया गया, जिसके कारण सड़क निर्माण कार्य में बार-बार रूकावट हो रहीं है।
इसलिए भू-अर्जन विभाग को चाहिए कि अंचल कार्यालय से मिलकर अंचल के माध्यम से ही कैंप लगाया जाये, ताकि सही जानकारी किसकी ज़मीन है वही पता चल जाएगा। सूत्र बताते है कि कसमार अंचल द्वारा अंचल में ही जो सड़क में ज़मीन गया है उससे संबंधित कागजात की जांच कर रिपोर्ट की मांग करने की जरुरत थी।
113 total views, 1 views today