नंद कुमार सिंह/फुसरो (बोकारो)। मसीही समाज का सबसे बड़ा पर्व क्रिसमस को लेकर उत्साह चरम पर है। चारों ओर साफ-सफाई के साथ सजावट का काम चल रहा है। बाजार में खरीदारी के लिए लोग उमड़ने लगे हैं। चर्च में चरनी बनाने का काम जोरो पर है।
बोकारो जिला (Bokaro district) के हद में बेरमो कोयलांचल में करगली यूनिट के युवा समूह कैरोल के माध्यम से प्रभु के आने की संगीतमय सूचना मसीही समाज के लोगों तक पहुंचा रहे हैं। सांता रात के अंधेरे में प्रभु आगमन की खुशी में उपहार बांट रहे हैं।
क्रिसमस को खास बनाने के लिए युवा,महिला और वयस्कों की टीम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अभ्यास कर रहे हैं। युवा ग्रुप कैराल के माध्यम से प्रभु के आने का संदेश दे रहे है। चर्च में 24 दिसंबर की मध्यरात्रि प्रभु यीशु मसीह का जन्म दिवस मनाया जाएगा।
फादर प्रबल खाखा के अनुसार क्रिसमस एकता, शांति, आशा और न्याय का पर्व है। प्रभु के वचनों को अपने कार्यो में प्रकट करना होगा। धर्म, जाति से ऊपर उठकर काम करना होगा। प्रभु ने कोई धर्म नहीं बनाया। धर्म तो बाद में लोगों ने बनाया।
कार्मेल स्कूल करगली की सिस्टर इनेट के अनुसार प्रभु यीशु का जन्म प्राणियों के उद्धार के लिए हुआ था। बुराइयों से त्राहिमाम कर रही जनता मुक्ति की आश में हैं। प्रभु के जन्म के समय भी जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी। लोगों को प्रभु के बताए मार्ग पर चलना होगा।
प्रभु यीशु मसीह मानव रूप में आए और लोगों को प्रेम और शांति का संदेश दिया। वे मानव जाति के बीच प्रेम, विश्व में भाईचारा और चारों ओर शांति देखना चाहते थे। प्रभु के वचनों को अपने जीवन में उतारें।
स्थानीय रहिवासी बबलू पाल के अनुसार क्रिसमस मनाने के पूर्व हमें प्यार, भाईचारा को अपनाना होगा। हर व्यक्ति में मानवता का स्वभाव हो। देश के सर्वांगीण विकास में सबकी सहभागिता हो तभी सही मायने में क्रिसमस है।
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