रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक बाहा पर्व राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव रामगढ़ जिला के हद में गोला प्रखंड के नेमरा में 5 मार्च को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री स्वयं गांव पहुंचकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व में शामिल हुए और जाहेर थान में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।
इस मौके पर मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि बाहा पर्व आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और सामुदायिक जीवन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने, अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखने तथा समाज में आपसी सहयोग और एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी विविधतापूर्ण संस्कृति और परंपराओं से है। ऐसे पर्व समाज में भाईचारा, सद्भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करते हैं।
मुख्यमंत्री के अपने पैतृक गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। इस दौरान ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक नृत्य-गीत प्रस्तुत किए गए। साथ हीं पूरे गांव में उत्सव का माहौल देखने को मिला। उन्होंने सभी राज्यवासियों को बाहा पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। उन्होंने सभी को बाहा पर्व की बहुत-बहुत बधाई और जोहार कहा।
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