हलफनामा में तथ्य छुपाने के मामले में छ्परा नगर निगम मेयर बर्खास्त

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बिहार राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ दीपक प्रसाद ने गलत हलफनामा एवं तथ्य छुपाने का दोषी पाते हुए छ्परा नगर निगम के मुख्य पार्षद (मेयर) राखी गुप्ता को दोषी पाया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने मेयर को अयोग्य करार देते हुए 27 जुलाई को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।

जानकारी के अनुसार राज्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने ज्ञापांक -13/2023 के तहत 27 जुलाई को जारी अपने आदेश में उपरोक्त जानकारी दी है। जारी आदेश में कहा गया है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम- 2007 की धारा – 18 (1) (एम) के तहत अर्हता प्राप्त नहीं रहने के कारण राखी गुप्ता को बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-18 (1) (एम) सहपठित धारा-18 (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों के अधीन अयोग्य/निरर्हित घोषित करते हुए, तत्काल प्रभाव से मुख्य पार्षद (मेयर) छपरा नगर निगम के पद से पदमुक्त किया जाता है।

कहा गया है कि इस आदेश के साथ ही मुख्य पार्षद (मेयर) छपरा नगर निगम का पद रिक्त समझा जाएगा तथा नियमानुसार इस पर निर्वाचन की कार्रवाई सम्पन्न की जाएगी।

उक्त आदेश में निर्वाचन आयुक्त ने सारण के जिला पदाधिकारी से कहा है कि राखी गुप्ता के विरूद्ध गलत हलफनामा एवं तथ्य छुपाने के लिए बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा-447 तथा अन्य सुसंगत धाराओं के तहत नियमानुसार विधिक कार्रवाई हेतु जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) एवं जिला दण्डाधिकारी सारण (छपरा) के रूप में प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करना अपरिहार्य है।

अतएव इस संबंध में इनके स्तर से अनुवर्ती कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाए। इस आदेश के साथ इस वाद को निष्पादित किया जाता है। उक्त आदेश की प्रति अपर मुख्य सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग बिहार पटना को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भी प्रेषित किया गया है।

बर्खास्तगी की वजह बना दो से अधिक संतान का होना

छपरा के मेयर राखी गुप्ता की बर्खास्तगी की वजह बन गया उनकी दो से अधिक संतान का होना। पटना के बड़े स्वर्ण व्यवसायी अलंकार परिवार से जुड़ी राखी ने लखनऊ से एमबीए किया है। निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में जिलाधिकारी और निर्वाचन पदाधिकारी नगरपालिका को राखी गुप्ता के खिलाफ साक्ष्य छिपाने के आरोप में कारवाई करने की अनुशंसा की है। इसे लेकर पूर्व मेयर सुनीता कुमारी ने कहा कि न्याय की जीत हुई है।

राज्य चुनाव आयोग ने जो आदेश पारित किया है वह काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि राखी गुप्ता का पद जाना ही था, क्योंकि तथ्य छुपाने के मामले का रहस्योद्घाटन हो चुका था। उन्होंने बताया कि राखी गुप्ता के तीन संतान है। जिसमें 14 वर्षीय श्रीयांशी प्रकाश, 9 वर्षीय शिवंशी प्रकाश और 6 वर्षीय श्रीप्रकाश शामिल है। परंतु अपने नामांकन में उन्होंने सिर्फ दो बच्चों के बारे में ही जानकारी दी थी।

ज्ञात हो कि, राखी गुप्ता पर लगे आरोपों की सुनवाई लगभग छह माह चली और जांच में तथ्य उनके खिलाफ पाया गया। अपनी बर्खास्तगी के बाद राखी गुप्ता ने कहा कि छपरा नगर निगम के इतिहास में पहली बार 167 रोड एवं नालों के निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई। कटहरी बाग से अपार्टमेंट होते हुए राहुल गिरी के घर तक रोड एवं नाला के निर्माण को भी स्वीकृति मिली।

मलखाना चौक से सदर इमाम मस्जिद तक पथ एवं नाला का निर्माण को भी स्वीकृति दी गईं। गुदरी बाजार से बूटी मोड़ तक पीसीसी पथ एवं नाला का निर्माण होगा, जिससे रहिवासियों तथा राहगीरों को जल जमाव से मुक्ति मिलेगी। भगवान बाजार धर्मनाथ द्वार से थाना होते हुए सत्यनारायण मंदिर तक पीसीसी रोड एवं दोनों तरफ नाला निर्माण की भी स्वीकृति दी गई।

ब्रह्मपुर पुल से भगवान बाजार होते दरोगा राय चौक तक एनएच के किनारे नाला निर्माण की स्वीकृति, रौजा पोखड़ा का होगा जीर्णोद्धार, छपरा नगर निगम वार्ड संख्या 1 से लेकर 45 तक सभी वार्ड में क्षतिग्रस्त नाला एवं स्लाइड निर्माण की स्वीकृति दी गईं।

बच्चों को लेकर क्या है प्रावधान

नगरपालिका अधिनियम में यह प्रावधान है कि चार अप्रैल 2008 के बाद किसी भी प्रत्याशी को दो से अधिक जीवित संतान रहने के कारण चुनाव पूर्व नामांकन पत्रों की जांच के दौरान ही अयोग्य घोषित कर दिया जाना है। बावजूद इसके राखी गुप्ता ने तथ्यों को छिपाकर गलत शपथ पत्र के आधार पर मुख्य पार्षद (मेयर) छपरा नगर निगम के पद पर निर्वाचित होने में कामयाब रही।

इसको लेकर आयोग ने बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (1) के तहत अर्हता प्राप्त नहीं रहने के कारण राखी गुप्ता को अयोग्य व निर्हरित घोषित कर दिया। नगर निगम आम चुनाव में राखी के विजयी होने के बाद छपरा की सुनीता देवी ने आयोग को आवेदन देकर शिकायत की थी कि निर्वाचित मेयर को दो से अधिक संतान है।

सुनीता देवी ने राखी के निर्वाचन को रद्द करने की मांग की थी। इसके बाद दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद वाद संख्या-13-2023 में मामले की सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने दो से अधिक संतान के मामले में यह फैसला दिया है।

 

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