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केंद्र सरकार झारखंड का बकाया ₹19,080 करोड़ रोककर विकास में बन रही बाधक-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। केंद्र की वर्तमान भाजपा सरकार झारखंड का बकाया ₹19,080 करोड़ की सहायता राशि रोककर राज्य के विकास को धीमा करने का षडयंत्र कर संविधान की भावना और सहकारी संघवाद का अपमान कर रही है।

उपरोक्त बाते 11 दिसंबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इस सम्बन्ध में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, जनजातीय मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, खनन मंत्रालय, जलशक्ति मंत्रालय, नीति आयोग एवं सभी संबंधित विभागों के केन्द्रीय मंत्रालय व् सचिव को विस्तृत इमेल पत्र के माध्यम से तत्काल भुगतान की मांग की है।

नायक ने भेजे गये ईमेल संदेश में कहा है कि झारखंड की महत्वपूर्ण योजनाओं की ₹19,080 करोड़ की राशि केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों में अटकी है, जिसके कारण राज्य के गरीब, आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े और ग्रामीण समाज तथा छात्र छात्राओ की छात्रवृति योजनाएँ बुरी तरह प्रभावित होकर ठप्प हो रही हैं। यह राज्यवासियों के लिए चिंता के साथ साथ आक्रोश का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ बकाया नहीं, बल्कि झारखंड के विकास पर एक रोक है। जिससे आज राज्यवार विकास तुलना में झारखंड को लगातार फंड डिले होने से कुपोषण, बेरोजगारी, सड़क परियोजनाएँ, छात्रवृत्ति सबसे अधिक प्रभावित हो रही है।

ईमेल में नायक ने कहा है कि देश के कई राज्यों को समय पर फंड जारी कर दिया जाता है, लेकिन झारखंड के साथ एक षडयंत्र कर फण्ड देने में अनावश्यक देरी की जा रही है। इसके कारण आज मनरेगा मजदूरों की मजदूरी अटकी है, ग्रामीण आवास योजना ठप्प पड़ गई है। छात्रवृत्ति भुगतान से छात्र छात्राओ का भविष्य चौपट हो रहा है। सड़क निर्माण व पेयजल परियोजनाएँ रुकी हुई है। खनन प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्विकास डीएमएफ फंड के बिना अधूरा है।

उन्होंने उदहारण देते हुए कहा कि केंद्र के विभिन्न विभागों में झारखंड की बकाया राशि यथा मनरेगा भुगतान ₹2,100 करोड़, पीएम आवास योजना (ग्रामीण) ₹1,850 करोड़, एनएचएम/स्वास्थ्य मिशन ₹1,150 करोड़, छात्रवृत्ति (एससी/एसटी/ओबीसी) ₹1,260 करोड़, पीएमजीएसवाई/सीएआरआईएफ सड़क निधि ₹2,750 करोड़, खनन राजस्व /डीएमएफ ₹1,540 करोड़, जल जीवन मिशन ₹1,780 करोड़, स्मार्ट सिटी/नगर विकास ₹920 करोड़, सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹310 करोड़, आपदा प्रबंधन एसडीआरएफ/एनडीआरएफ ₹870 करोड़, वन अधिकार/जनजातीय योजनाएँ ₹600 करोड़, केंद्रीय उपकर/राजस्व हिस्सेदारी ₹3,950 करोड़, कुल लंबित बकाया राशि लगभग ₹19,080 करोड़ है।

नायक ने कहा कि केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए कि क्या झारखंड दोयम दर्जे का राज्य है? क्या केंद्र के पास झारखंड के गरीबों के अधिकार बाधित करने की कोई नीति है? क्या आदिवासी, मूलवासी, गरीब बहुल राज्य को आर्थिक रूप से कमजोर करने का इरादा है? उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार बकाया राशि की तुरंत भुगतान नहीं करता है, तो झारखंड की जनता एक व्यापक आंदोलन करेगी और केंद्र को इसका राजनीतिक व सामाजिक जवाब मिलेगा।

उन्होंने कहा कि बकाया रोककर राज्य का विकास धीमा करना, संविधान की भावना और सहकारी संघवाद दोनों का अपमान है, जिसे झारखंडी जनता अब बर्दाश्त नही करेगी।
नायक ने कहा कि झारखंड अब किसी भी कीमत पर अपने पैसे से वंचित नहीं रहेगा। राज्य की जनहित योजनाओं को बाधित करने की अनुमति अब किसी भी कीमत पर इजाजत नहीं दी जाएगी।

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