पुरा झारखंड जयंत मुनी महाराज का सदैव ऋणी रहेगा-विधायक
मेरी पहली पदस्थापना के बाद यहां मुझे गुजराती में बात करनेवाला जयंत मुनी थे-डीआईजी
जयंत मुनी के शताब्दी समारोह में निकली प्रभात फेरी व् पुस्तक का विमोचन
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। जैन समाज के धरोहर व् महान विभूति पूज्य तपस्वी जयंत मुनी महाराज की सौवीं जन्म जयंती के अवसर पर 24 अक्टूबर को बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड मुख्यालय स्थित जगजीवनजी महाराज चक्षु चिकित्सालय परिसर में शताब्दी महोत्सव समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उनके अनुयायियों द्वारा भव्य प्रभात फेरी निकाली गयी। समारोह में कोयला क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी), गोमियां विधायक, साध्वी सहित दर्जनों गणमान्य शामिल हुए।
पेटरवार स्थित पूज्य जगजीवनजी महाराज चक्षु चिकित्सालय परिसर में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि गोमियां विधायक डॉ लंबोदर महतो ने कहा कि साधु के पास सम्पत्ति का दान करने के लिए नहीं बल्कि विचार दान होता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1981 में झारखंड की धरती तब धन्य हो गया जब पेटरवार में पूज्य जयंत मुनी महाराज के पांव यहां पड़ा। साथ हीं मुनी महाराज द्वारा यहां नेत्र अस्पताल की शुरुआत कर यहां के रहिवासियों की सेवा प्रारंभ किया गया। उन्होंने कहा कि वे शौभाग्यशाली हैं कि उन्हें मुनी महाराज से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
वे केवल एक संत हीं नहीं बल्कि सच्चे अर्थो में मानव समाज के हितैषी और रक्षक भी थे। उन्होंने कहा कि मुनी महाराज की सोंच अहिंसा परमो धर्म के साथ सम्पूर्ण मानव समाज की सेवा करना रहा है।
विशिष्ट अतिथि डीआईजी मयूर पटेल ने कहा कि गुरुदेव और सभी संतों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009-10 में जब वे बेरमो के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे तब वे सप्ताह में कम से कम एक बार यहां जरुर आते थे। उस समय पूज्य गुरुदेव जयंत मुनी से आशीर्वाद मिलता था। जिससे उन्हें कार्य करने में काफी ऊर्जा प्राप्त होता था।
कहा कि मुनी महाराज और मेरा घर एकदम पास में था। उन्होंने कहा कि बेरमो पदस्थापना के समय मुझसे गुजराती भाषा में बात करनेवाला केवल जयंत मुनी महाराज ही थे। यह मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य की बात है कि ऐसा लगता था कि मैं अपने घर पर अपनों के बीच हूँ। कहा कि गुरु देव एक ऐसे महापुरुष थे जो गुजरात से आकर पेटरवार की धरती पर मानव सेवा के कार्य और संत का जीवन जिए। उनके अच्छे कार्य हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है।
प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ डीके गुप्ता ने कहा कि वे सर्वप्रथम जयंत मुनी महाराज को शत-शत नमन करते हैं, जिन्होंने उन्हें मानव जीवन जीने और मानव सेवा का पाठ पढ़ाया था। जिसके बदौलत वे आज इस मुकाम को पा सके हैं।
उन्होंने कहा कि पूज्य मुनी महाराज जब बीमार थे और उन्हें ऑक्सीजन लगा था तब उनसे मिलने पर मुनी महाराज द्वारा अस्पताल की प्रगति और मरीजों का हाल चाल की जिज्ञासा प्रकट करना वे ताउम्र नहीं भूल सकते है। क्योंकि संत अपने लिए नहीं बल्कि पुरे संसार के लिए जीवन जीता है।
यह पूज्य जयंत मुनी महाराज में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि संस्था के सहयोग से उन्हें यहां 35 वर्ष नेत्र रोगियों का इलाज करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुनिजी महाराज के बारे में उन्होंने कहा कि मुनिजी आध्यात्मिक, त्याग, तपस्या एवं मानव सेवा के प्रतीक थे। सिर्फ वे धर्म गुरु ही नहीं बल्कि अपने मानव सेवा से गरीब गुरबे आदिवासी के लिए कार्य किया।
आप सबों के सहयोग से जितने भी सेवा से संभव हो सका जिसमें झारखंड के मुख्यमंत्री, बिहार, बंगाल तथा उड़ीसा के तटवर्ती जिसने सहयोग दिया। कहा कि झारखंड की धरती में मुनी महाराज की सेवा युगो युगो तक याद किया जाता रहेगा। जमशेदपुर से आये मन्नत भाई देसाई ने कहा कि बचपन में मुनी महाराज चाकू भाई के नाम से प्रसिद्ध थे। उनका जीवन मानव समाज के लिए प्रेरणा दायक है।
इस अवसर पर नम्र मुनी महाराज ने ऑनलाइन उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस गुरुदेव ने पुरे देश पर उपकार करने के लिए अपना सर्वस्व दे दिया, उस गुरु महाराज के लिए वर्ष में दो आयोजन तो बनता है। उन्होंने कहा कि साधु के पास संपत्ती का दान करने के लिए नहीं विचार दान होता है।
कहा कि पूज्य गुरुदेव द्वारा देश के 34 स्थानों पर धर्म स्थापना के लिए कार्य किया गया। यह सबसे बड़ा उपकार है। कहा कि जयंत मुनी महाराज ने अपनी सोंच समझ की बदौलत कितनो परिवार को बसाया, बचाया यह गुजराती समाज के लिए गर्व की बात है।
नम्र मुनी महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि जबतक हमारा स्वार्थ रहता है हम गुरुदेव की चरणों में रहते है। जैसे ही हमारा मतलब पुरा होता है हम भूल जाते है। यही हम इंसानों और महान संतो में अंतर है।
शताब्दी समारोह के अवसर पर साध्वी दर्शना बेन सप्तसती तथा साध्वी स्वाति बेन सप्तसती द्वारा अल्प उपवास तपस्या में लीन 64 भैया बहनों जिसने बीते एक साल से दिन में केवल एकबार और एक दिन छोड़कर उपवास रखा उन्हें सम्मानित किया तथा पूज्य मुनी के बताये मार्ग मानव जीवन की निश्छल भाव से सेवा करने की बात कही।
इस अवसर पर परम दर्शन यशोगाथा पुस्तक का विमोचन उपस्थित अतिथियों तथा ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। इससे पूर्व जैन समाज द्वारा जैन मंदिर से कार्यक्रम स्थल तक सैकड़ो श्रद्धालुओं द्वारा प्रभात फेरी निकाला गया।
मौके पर मुख्य अतिथि गोमियां विधायक डॉ लंबोदर महतो, विशिष्ट अतिथि कोयलांचल क्षेत्र के डीआईजी मयूर पटेल, चक्षु चिकित्सालय निर्माणकर्ता पुष्पराज अरोड़ा, जैन समाज से मीडिया प्रभारी व् समाजसेवी हरीश दोशी उर्फ राजू भाई, भरत दोशी, ट्रस्टी शांति लाल जैन, प्रवीण भाई, सुबोध मेहता, काकू भाई, किरण भाई बटेरिया, भावेश दोशी, राजू भाई, गिरीशभाई कोठारी, आदि।
भरत भाई मोरिया, बीनू भाई, जीतू भाई रुपाणी, जसवीर सेठ, दीपक दफ्तरी, चिराग शाह, हर्ष भाई अजमेरा, हितेश भाई रणपेरा, दिनेश भाई बोरा, जगजीवन जी महाराज ट्रस्ट के प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद, पेटरवार थाना प्रभारी विनय कुमार सहित कोलकाता, मुंबई, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, रांची, हजारीबाग, गिरिडीह आदि क्षेत्रों से सैकड़ो की संख्या में महिला-पुरुष जैन धर्मालंबी मौजूद थे।
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