बिरसा मुंडा व् लको बोदरा के चित्र पर माल्यार्पण कर मनाया विश्व आदिवासी दिवस

सरना स्थल में पौधारोपण कर पर्यावरण शुद्धता व लंबी आयु की कामना की गई

सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला (West Singhbhum District) के हद में गुवा क्षेत्र स्थित सामुदायिक भवन में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम हर्षोल्ल्लास से मनाया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि बैंक ऑफ इंडिया गुवा शाखा के प्रबंधक सुदीप सिंकू एवं गुवा पश्चिम पंचायत के मुखिया पद्मिनी लागरी की अध्यक्षता में क्रांतिकारी बिरसा मुंडा एवं कोल गुरु लको बोदरा के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित पूर्व मुखिया कपिलेश्वर डोंगो, प्रदीप सुरेन, मंगलदास पूर्ति, सुशील पूर्ति, पंचम जाँर्च व अन्य के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर नमन किया गया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बैंक ऑफ इंडिया गुवा शाखा वरीय प्रबंधक सह मुख्य अतिथि सुदीप सिंकू ने कहा कि वर्तमान परिवेश में शिक्षा के माध्यम से आदिवासियों को अपना अधिकार प्राप्त करना चाहिए।उन्होंने इस बार विश्व आदिवासी दिवस का थीम ‘पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसारण में स्वदेशी महिलाओं की भूमिका’ पर विचार दिया।

सिंकू ने कहा कि सही मायने में देखा जाए तो आदिवासियों की संस्कृति को आगे बढ़ाने में आदिवासी महिलाओं का अहम योगदान रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी बढ़-चढ़कर हर जगह बनी रहती है।

आदिवासी समाज के लोग कितना भी पढ़ लिखकर आगे मॉडर्न बन जाए, लेकिन उन्हें अपनी संस्कृति को आगे ले जाने में भागीदारी हर जगह बनाए रखनी चाहिए। समाज के प्रतिष्ठित पद पर होने के बाद कभी भी आदिवासी होने का शर्म महसूस ना करें। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुवा पश्चिम पंचायत मुखिया पद्मिनी लागुरी ने कहा कि 9 अगस्त 1995 को पहला विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।

तब से पूरे विश्व में आज के दिन आदिवासी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आबादी के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व के आदिवासी लोगों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day) के रूप में मनाया जाता है।

पूर्व मुखिया कपिलेश्वर डोंगो ने कहा कि आदिवासी शब्द दो शब्दों ‘आदि’ और ‘वासी’ से मिल कर बना है। इसका अर्थ मूल निवासी होता है। भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बनी है। उम्मीद की जाती है कि उनके मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देशन में झारखंड के आदिवासियों को नया आयाम एवं विकास का मार्ग प्रसस्त होगा।

आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदीप सुरेन, मंगलदास पूर्ति, सुशील पूर्ति, जगमोहन पूर्ति, सुनीता सामद, पंचम जार्ज व अन्य ने अपने विचारों के माध्यम से आदिवासी मूल निवासी एवं उनकी रक्षा पर विचार दिए।

सबो ने खुले दिल से भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की प्रशंसा करते हुए यह उम्मीद जताया कि अब उनके मार्गदर्शन में आदिवासियों को उनका न्याय एवं हक निश्चित रूप से मिलेगा। कार्यक्रम में मंच संचालन सुशील पूर्ति द्वारा किया गया।

इससे पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में गुवा साई सरना स्थल में पौधारोपण किया गया। जिसमें आदिवासी समुदाय के सम्मानित रहिवासियों में बैंक ऑफ इण्डिया प्रबंधक सुदीप सिंकू, मुखिया पद्मिनी लागुरी के साथ -साथ शंभू पूर्ति, संजीव पूर्ति व अन्य ने पौधों की पूजा कर पर्यावरण की शुद्धता व मानव जीवन की लंबी आयु की कामना की।

पौधों की पूजा दिउरी सुशील पूर्ति के द्वारा की गई। कार्यक्रम के पूर्व क्षेत्रीय आदिवासी महिलाओं के द्वारा नृत्य गीत प्रस्तुत की गई। आगन्तुक अतिथियों के साथ नृत्य वंदना करते हुए महिलाएं गुआ साईं सामुदायिक केन्द्र व सरना स्थल तक पहुंची। सामुदायिक केंद्र गुवा में एकजुट हो सबों ने विश्व आदिवासी दिवस पूरे प्रसन्नता एवं एकता के साथ मनाया।

इस अवसर पर जीवन हांसदा, सिरफ हांसदा, अमित सोरेन, रामदास हांसदा, अल्बर्ट डांहगा, बीर सिंह पूर्ति, शंभू पूर्ति, राय कुमारी सिद्धू, राय सिद्धू, अनीता पूर्ति, यशोदा बोयपाय, ममता बोयपाय, हेमंती आईन्ड, बाह लेन कंडूलना, सुमित्रा पूर्ति, जगमोहन पूर्ति, ‘ठाकुरा गाँव मुंडा दामू चॉपिया जयराम चापिया व अन्य कई कार्यक्रम में शिरकत करते देखे गए।

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