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सीसीएल के करमा परियोजना खदान हादसे में मौत अवैध खनन का खूनी परिणाम-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के रामगढ़ जिला के हद में कुजू ओपी क्षेत्र में सीसीएल के करमा परियोजना खुली खदान में हादसे से हुई मौत सरकार की लापरवाही और माफिया के संरक्षण में फल-फूल रहे अवैध खनन का खूनी परिणाम है। उक्त बाते आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने 5 जुलाई को कही।

ज्ञात हो कि, झारखंड के सीसीएल कुजू क्षेत्र के करमा परियोजना खुली खदान में 5 जुलाई की सुबह हुए दिल दहलाने वाले हादसे ने एक बार फिर हेमंत सोरेन सरकार की नाकामी और भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। कोलियरी में चाल धंसने से चार गरीब मजदूरो 42 वर्षीय निर्मल मुंडा, 55 वर्षीय वकील करमाली, 38 वर्षीय इम्तियाज खान उर्फ लालू खान और 35 वर्षीय रामेश्वर मांझी की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य 35 वर्षिया रोजिदा खातून, 40 वर्षिया सरिता देवी और 22 वर्षीय अरुण मांझी गंभीर रूप से घायल है।

उक्त दर्दनाक घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष नायक ने कहा कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि हेमंत सोरेन सरकार की लापरवाही और माफिया के संरक्षण में फल-फूल रहे अवैध खनन का खूनी परिणाम है। उन्होंने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आक्रोशित और तीखे शब्दों से हमला करते हुए इसे सीधे तौर पर दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग की हत्या करार देते हुए कहा कि यह हत्या उस भ्रष्ट व्यवस्था की है, जो दिन-रात अवैध कोयला खनन को संरक्षण दे रही है।

कहा कि सरकार की नाक के नीचे माफिया खुलेआम काला कारोबार चला रहे हैं और पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बनी है। क्या यह संयोग है कि सीसीएल द्वारा बंद की गई खदान को माफिया ने फिर से शुरू कर दिया और सरकार को इसकी भनक तक नहीं? यह सरकार की नाकामी नहीं तो और क्या है? उन्होंने कहा कि झारखंड के गरीब दलित, आदिवासी और मूलवासी रोजी-रोटी की तलाश में अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। वहीं सरकार की लापरवाही उनकी जिंदगी छीन रही है।

नायक ने कहा कि झारखंड के रामगढ़, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, बोकारो हर जगह मौत का यह काला खेल बेरोकटोक चल रहा है। यह स्पष्ट है कि यह अपराध पुलिस और सरकारी संरक्षण के बिना संभव नहीं है। जब राज्य का नेतृत्व ही भ्रष्टाचार में डूबा हो, तो गरीबों की जान की कीमत क्या रह जाती है?

उन्होंने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच कर माफिया और उनके संरक्षकों का पर्दाफाश करने, अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और दोषी अधिकारियों व नेताओं को कठोर सजा देने, मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा और घायलों को मुफ्त इलाज व 5 लाख मुआवजा देने, झारखंड में अवैध खनन के पूरे नेटवर्क की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है।

नायक ने राज्य के हेमंत सोरेन सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि झारखंड की जनता अब इस अवैध खनन से हो रहीं मौतों को कदापि बर्दाश्त नहीं करेगी। हर दलित, आदिवासी, मूलवासी के मौतों का हिसाब सरकार से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार गरीबों की लाशों पर सत्ता की रोटियां सेंकना बंद करे। आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच इस अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगा।

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