पेनल्टी लगाने के बदले कंपनी को सुरक्षा राशि वापस करने की कार्य प्रगति पर
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। सीसीएल प्रबंधन की बात हीं निराली है। कब किसपर मेहरबान हो जाये कहना मुश्किल है। यह कोई थोथी सोंच नहीं बल्कि धरातल की हकीकत है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अधूरा काम करनेवाले आउटसोर्सिंग कंपनी (Outsourcing Company) पर सीसीएल प्रबंधन की मेहरबानी समझ से परे है। बताया जाता है कि बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्र के जारंगडीह परियोजना में वर्ष 2017 में चेन्नई राधा इंजिनियरिंग वर्कस आउटसोर्सिंग कंपनी को ओबी रिमूवल करने के लिए तीन साल का ठेका सीसीएल द्वारा दिया गया था।
इस कार्य के बदले में सीसीएल द्वारा उक्त आउटसोर्सिंग कंपनी को लगभग 23 करोड़ राशि भुगतान किया जाना था। जिसका एनआईटी क्रमांक-CCL/GM(CMC)/KTA/2017/53-06.06.2017& Tender ID:2017-CCL-71509-1 है।
इस संबंध में स्थानीय सीसीएल कामगार बताते है कि उक्त कंपनी द्वारा कार्य पूर्ण नहीं किया गया। बावजूद इसके आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा अधूरा कार्य की बात को दरकिनार कर सीसीएल प्रबंधन द्वारा कंपनी का क्लोजर रिपोर्ट बनाकर बिना पेनल्टी काटे हीं सिक्योरिटी मनी भुगतान की प्रक्रिया अपनायी जा रही है। ऐसे में उक्त कंपनी को एनआईटी के मुताबिक जो पेनल्टी कटना चाहिए था वह नहीं काटा गया है। यह जांच का विषय बनता है।

बताया जाता है कि उक्त आउटसोर्सिंग कंपनी का एनआईटी एलओए क्रमांक-CCL/GM(CMC)/Kathara/LOA/2017/NIT-53/2017/1383, 23/8/2017 है।
इस संबंध में कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक हर्षद दातार से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि जिस समय उक्त कंपनी द्वारा काम अधूरा छोड़ दिया गया था, तभी उक्त कंपनी को डी-बार किया जाना चाहिए था। लेकिन तब के स्थानीय प्रबंधन द्वारा मामले में शिथिलता बरती गयी।
उन्होंने स्वीकार किया कि एनआईटी के अनुसार उक्त कंपनी के विरुद्ध पेनल्टी जो लगना चाहिए वह मुख्यालय प्रबंधन के जिम्मे है। क्योंकि वर्तमान में उक्त आउटसोर्सिंग कंपनी का उनके क्षेत्र में किसी प्रकार की सक्रियता नहीं है। इसलिए वे इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ है।
इस बावत आउटसोर्सिंग कंपनी के अधिकृत अधिकारी शैथिल कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने मामले से जुड़े बातो की जानकारी नहीं होने की बात करते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं है, क्योंकि तब के वहां कार्यरत उनके स्थानीय प्रबंधन व अन्य चले गये हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि वे केवल सिक्योरिटी मनी रिफंड को लेकर यहां हैं। यदि सीसीएल प्रबंधन नहीं देगी तो कंपनी वापस लेना जानती है। इसके लिए उनकी कंपनी का लीगल विभाग है। ऐसे में समग्र विषय की जांच आवश्यक है।:-क्रमशः
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