एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने एचईसी में गरीबों के आशियानों पर चलाए जा रहे बुलडोजर को नृशंस, अमानवीय और गरीबों के प्रति घृणित साजिश करार देते हुए तीव्र आक्रोश जताया है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के आदेशों की खुली अवमानना बताया, जो बिना पुनर्वास के अतिक्रमण हटाने पर रोक लगाते हैं।
नायक ने 6 सितंबर को एचईसी प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी। साथ हीं कहा कि यह गरीबों के जीवन और सम्मान पर हमला है, जिसे हम किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड की राजधानी रांची में स्थित एचईसी में बरसों से रह रहे गरीब मजदूरों के घरों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के तोड़ना क्रूरता और संविधान के अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन है। यह सत्ता का दुरुपयोग और गरीबों के प्रति घृणा का प्रतीक है। हम इस अत्याचार के खिलाफ सड़क से सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ेंगे।
नायक ने सुप्रीम कोर्ट में सायर मामलों का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (10 जुलाई 1985) आजीविका का अधिकार अनुच्छेद 21 का हिस्सा बिना पुनर्वास के बेदखली गैरकानूनी करार दिया है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चमेली सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (18 दिसंबर 1995) में आश्रय का अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए बिना पुनर्वास के बेदखली को असंवैधानिक कहा है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुदामा सिंह बनाम दिल्ली सरकार (11 फरवरी 2010) में कहा है कि अतिक्रमण हटाने से पहले पुनर्वास अनिवार्य है।
नायक ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में हल्द्वानी बेदखली मामला (जनवरी 2023 और 24 जुलाई 2024) में पुनर्वास के बिना अतिक्रमण हटाना अमानवीय करार देते हुए कोर्ट ने कहा कि वे भी इंसान हैं। नायक ने कि एचईसी में यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाती है। यह गरीबों को उनके मानवाधिकारों से वंचित करने की साजिश है।
प्रशासन तत्काल यह बर्बरता रोके, वरना हम कानूनी और जन आंदोलन से जवाब देंगे। कहा कि आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच ने चेतावनी दी कि यदि गरीबों के हितों की अनदेखी जारी रही, तो सड़कों पर व्यापक जन आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि, यह बुलडोजर गरीबों के घर ही नहीं, संविधान और मानवता को कुचल रहा है। हम सभी से इस अत्याचार के खिलाफ एकजुट होने की अपील करते हैं।
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