एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राजनीति अब पूरी तरह स्क्रिप्टेड हो चुकी है। जैसे किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो। घटना पहले लिखी जाती है, फिर उस पर प्रोपेगेंडा बनता है और विपक्ष पर केस दर्ज हो जाता है।
उपरोक्त बातें 2 सितंबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही। वे बिहार मे राहुल गांधी व् तेजस्वी यादव के मंच से गाली प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसने गाली दी, ये अब मुद्दा नहीं है। मुद्दा ये है कि गाली किसके मंच के आसपास से दी गई थी। भले ही मंच से नेता जा चुके हों। लाइटें बुझ चुकी हो। कुर्सियाँ समेटी जा रही हो। अगर कहीं कोने में कोई सिरफिरा माइक पकड़ ले और कुछ उल्टा-सीधा बक दे, तो बीजेपी के लिए यही सबूत बन जाता है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने गाली दिलवाई है।
नायक ने कहा कि याद कीजिए जब पीएम मोदी ने जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल उठाए थे। क्या वह गाली नहीं था। जब राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी को कांग्रेस की बिधवा और पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था, तो क्या वह गाली नहीं था? कहा कि आपने तो नीतीश कुमार के डीएनए के बहाने सम्पूर्ण बिहार की मां, बहनो एवं पुरुष समाज को गाली देने का घिनौना काम किया है। बिहार की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगा।
नायक ने कहा कि राहुल और तेजस्वी ने न गाली दी, न सुनी, न बढ़ावा दिया। लेकिन भाजपा को क्या फर्क पड़ता है। गाली के बाद वीडियो बना और वह वीडियो सीधा बीजेपी के आईटी सेल मे गिरा।उसके बाद रातोंरात आईटी सेल के ने काम कर डाला। पोस्टर तैयार हो गया, कैप्शन डिजाइन बन गई, ग्राफिक्स सेट, हैशटैग ट्रेंड में डाल दिए गए। सुबह होते-होते हर मंत्री, विधायक, सांसद सोशल मीडिया पर एक ही लाइन की कॉपी-पेस्ट प्रतियोगिता में लगा दिये गये। खैर, इसी बहाने कुछ मंत्रियों का पता चला कि वे अब भी मंत्री हैं। वरना इस देश में रेल का उद्घाटन हो, पुल हो, चकरोड हो, नाली हो, शौचालय हो, सबका फीता तो खुद मोदीजी ही काटते हैं।
बाकियों का काम अब बस इतना रह गया है कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से आए कंटेंट को ट्विटर और फेसबुक पर चिपका दें और ट्रोल आर्मी के आशीर्वाद से खुद को राष्ट्रभक्त साबित करते रहें। नायक ने कहा कि असल में, बीजेपी की राजनीति अब पूरी तरह स्क्रिप्टेड हो चुकी है। जैसे किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो। घटना पहले लिखी जाती है, फिर घटाई जाती है, फिर उस पर प्रोपेगेंडा बनता है और विपक्ष पर केस दर्ज हो जाता है। अब देखिए, राहुल गांधी पर एफआईआर कर दी गई कि उनके मंच से गाली दी गई।
अगर यही नियम लागू किया जाए, तो फिर प्रधानमंत्री मोदी पर आधे से ज्यादा देश के अपराधियों के साथ मंच साझा करने के लिए केस दर्ज होने चाहिए। रेपिस्ट प्रज्वल रेवन्ना को न केवल मंच पर बुलाया, बल्कि उसका हाथ थाम कर वोट भी मांगे। लेकिन वहाँ कोई सवाल नहीं उठता, क्योंकि मंच 56 इंच का है और सवाल पूछना राष्ट्रविरोधी हो जाता है।
नायक ने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की गलती सिर्फ इतनी है कि वे अब भी राजनीति को मुद्दों की लड़ाई मानते हैं, जबकि सामने वाला इसे सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट समझ चुका है। वे इस गटर गंगा में उतरना ही नहीं चाहते, जहाँ गाली पहले लिखी जाती है, फिर दिलवाई जाती है और फिर उसी गाली के नाम पर विपक्ष को बदनाम किया जाता है। मोदीजी के लिए गाली एक रणनीति है। कभी खुद बोलेंगे, कभी कहलवाएँगे, फिर उस पर नैतिकता का चोगा पहनकर भाषण देंगे। ये सब स्क्रिप्टेड है। राहुल गांधी जैसे नेता इस स्क्रिप्ट के लिए खतरा हैं, क्योंकि वो सवाल पूछते हैं अडानी पर, अंबानी पर, बेरोज़गारी पर, सेना की भर्ती पर। इस देश में अब सवाल पूछना सबसे बड़ा अपराध है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी की राजनीति का मॉडल अब साफ है कि विपक्ष को गाली दो, फिर कहो कि गाली उन्होंने दी और फिर उसे राष्ट्रद्रोह में बदल दो। जनता को बस इतना दिखाओ कि देखो, मोदी अकेला सब पर भारी है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव उस स्तर तक नहीं गिर सकते, जहाँ मोदी और उनकी टीम सत्ता में टिके रहने के लिए गिर चुकी है। वे सत्ता के भूखे नहीं हैं, बल्कि सत्ता को जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इस दौर में जवाबदेही माँगना भी जुर्म है।
नायक ने तल्ख़ लहजे में कहा में गाली अब शब्द नहीं रही, हथियार बन गई है। उसे चलाने वाले जानते हैं कि निशाना कोई भी हो, शोर इतना मचाओ कि असली सवाल दब जाए।
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