डॉ अब्दुल कलाम थे भारत माता के महान सपूत-डॉ जी.एन. खान
प्रहरी संवाददाता/बोकारो। पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर 15 अक्टूबर को बोकारो जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जानकारी देते हुए विद्यालय के शिक्षक रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय के प्रार्थना सभा में मिसाइल मैन डॉ कलाम की जयंती मनाई गई।
इस अवसर पर सर्वप्रथम प्राचार्य एवं सभी शिक्षक -शिक्षिकाओं ने डॉक्टर कलाम के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। प्रार्थना सभा की सभी गतिविधियां डॉ कलाम पर ही आधारित थीं। विद्यालय के छात्रों यथा शिवम, आरोही, अनम, शुभंकर, श्रेया प्रिया, रीत एवं जैनब ने प्रार्थना सभा में प्रस्तुतियां दी।

अंत में विद्यालय के प्राचार्य सह झारखंड जोन-आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ जी. एन. खान ने अपने संबोधन में कहा कि डॉक्टर कलाम के जीवन का प्रत्येक पहलू प्रेरणादायक है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 में ओड़िशा राज्य के रामेश्वरम के धनुषकोडी गांव के एक अत्यंत साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता नाविक थे। वे अपने पिता की आर्थिक सहायता करने के लिए सुबह अखबार बेचते और फिर विद्यालय जाते थे।
प्राचार्य डॉ खान ने कहा कि संघर्षपूर्ण वातावरण में मिसाइल मैन डॉ कलाम ने अपनी पढ़ाई पूरी की। मद्रास तकनीकी विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पढ़ाई पूरी करने के बाद वे एक पायलट बनना चाहते थे, लेकिन विधि को कुछ और मंजूर था। वे देश के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक बने। उन्होंने डीआरडीओ एवं इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम भी किया। उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह पीएसएलवी-III के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साथ ही वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण परमाणु परीक्षण में भी भारत को सफलता दिलाई। उनका मानना था कि भारत को भी विश्व के अन्य विकसित देशों की तरह परमाणु शक्ति से संपन्न होकर अपनी रक्षा के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल, नाग जैसे मिसाइलों के निर्माण में डॉ कलाम का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसी कारण पूरी दुनिया उन्हें भारत के मिसाइल मैन के नाम से जानती है।
प्राचार्य डॉ खान ने कहा कि डॉ कलाम को एक सफल वैज्ञानिक के साथ साथ एक अच्छे लेखक भी माना जाता है। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी जिनमें अग्नि की उड़ान, मार्गदर्शक प्रकाश, तेजस्वी मन आदि प्रमुख हैं। कहा कि डॉ कलाम कहते थे कि यदि सूरज की तरह चमकना है तो सूरज की तरह तपना सीखो। विद्यार्थियों से उनका विशेष लगाव था। वे स्वयं को एक वैज्ञानिक कम और शिक्षक ज्यादा समझते थे।

विद्यार्थियों के साथ समय बिताना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। उनके जीवन का अंतिम क्षण भी विद्यार्थियों के साथ ही बीता। उन्होंने बताया कि 27 जुलाई 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में एक व्याख्यान के दौरान उन्हें हृदयाघात आया। इसी हृदयाघात ने उनकी इहलीला को समाप्त कर दिया। प्राचार्य ने विद्यालय के सभी विद्यार्थियों से कहा कि वे डॉक्टर कलाम के जीवन दर्शन का अवलोकन करें और उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।
इस विशेष प्रार्थना सभा को सफल बनाने में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक पंकज कुमार, डॉ आर एस मिश्रा, नागेंद्र प्रसाद, जितेंद्र दुबे, जयपाल साव, रंजीत कुमार सिंह, रितेश कुमार, बीके दसौंधी, वीणा कुमारी, रेखा कुमारी, आराधना, सुमन कुमारी की प्रमुख भूमिका रही।
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