दशकों से इस ओर नहीं गया जिला प्रशासन का ध्यान
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। कभी श्रावणी मेला और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सारण जिला के हद मे सोनपुर मेला तीर्थ यात्रियों के विश्राम स्थल के रूप में पूरे बिहार में प्रसिद्ध सोनपुर का बिहार प्रांतीय सेवा समिति भवन धर्मशाला ध्वस्त हो चुका है। इसकी भूमि भी अतिक्रमण की चपेट में है।
एक ओर सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सोनपुर का हरिहरनाथ मंदिर क्षेत्र कॉरिडोर की तैयारी चल रही है, वहीं इस जीर्णशीर्ण भवन के स्थान पर सारण जिला प्रशासन का ध्यान नहीं जाना घोर आश्चर्य का विषय बन गया है। यह सेवा समिति भवन धर्मशाला हाजीपुर सोनपुर पुराने गंडक पुल के निकट गज ग्राह चौक, संत रामलखन दास, काली घाट पथ में मुख्य सड़क के पूर्वी किनारे स्थित है। कई दशकों तक यह प्रांतीय सेवा सदन धर्मशाला दूर दराज से स्नान के लिए आए तीर्थ यात्रियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल हुआ करता था। धर्मशाला वैसे सरकारी भूमि पर अवस्थित है, पर इसको बनाने वाले समाजसेवी का प्रतिनिधि ही इसकी देखभाल करते थे।
सरकारी स्तर पर आयोजित मेला समिति की बैठकों में भी उसे आमंत्रित किया जाता था। वह शामिल भी होता था, पर जब धर्मशाला ही ध्वस्त हो गया तो प्रतिनिधि ने भी आना छोड़ दिया। इसके बाद सारण जिला प्रशासन ने भी अभी तक जर्जर धर्मशाला के जीर्णोद्धार के लिए इसकी सुधि नहीं ली है।
जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं जाना वास्तव में आम जनों एवं श्रावणी – कार्तिक मेला तीर्थ यात्रियों को आज भी व्यथित करता है। सच कहिए तो धर्म प्रधान इस मेले की मूल प्रकृति का यह ध्वस्त धर्मशाला उपहास उड़ाता प्रतीत होता है।
मेला क्षेत्र में सरकार द्वारा कतिपय रैन बसेरों के निर्माण को छोड़ दें तो यह मेला क्षेत्र का स्याह पक्ष ही है कि आम तीर्थ यात्रियों के लिए यहां एक भी धर्मशाला स्थापित नहीं है।
श्रद्धालुओं द्वारा मठ-मंदिरों में निर्मित कुछ धर्मशालाएं और कक्ष हैं जिनकी अपनी व्यवस्था है। जिनसे आम तीर्थ यात्री पूरी तरह लाभान्वित नहीं हो पाते है। लोक सेवा आश्रम जैसे आश्रम भी भक्तों की भीड़ को संभाल नहीं पाते।
पटना महाराजगंज पटना रहिवासी बुद्धन साह ने वर्ष 1881 में कराया था धर्मशाला निर्माण
उपेक्षित सेवा सदन धर्मशाला के पूरब पौराणिक च्यवन कुंड तालाब एवं नारायणी नदी नमामि गंगे पाथ-वे है। एक पथ आप रूपी गौरी शंकर मंदिर, खाक चौक ठाकुरबाड़ी एवं दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की ओर जाती है। इस धर्मशाला का निर्माण पटना जिला के महाराजगंज रहिवासी समाजसेवी धर्म प्रेमी बुद्धन साह ने वर्ष 1881 में कराया और तीर्थयात्रियों के निमित्त धर्मार्थ समर्पित किया था। धर्मशाला के हालात अब इतने खराब हैं कि अब इसमें कोई नहीं ठहरता। जंगल – झाड़ से इसका पूरा परिसर भर गया है। दो दशक पूर्व तक इसमें सरकारी विद्यालय संचालित थे, पर अब इसके दो मंजिले भवन के छत व सभी कमरे ध्वस्त व क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। तीर्थयात्रियों व पर्यटकों के लिए कभी आकर्षण का केन्द्र रहे इस दोमंजिले धर्मशाला की ईंटें बिखर चुकी है।
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