एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में फुसरो-डुमरी पथ पर मकोली मोड़ के समीप स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल ढोरी में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
जानकारी के अनुसार सीसीएल ढोरी क्षेत्र के महाप्रबंधक रंजय सिन्हा ने बतौर मुख्य अतिथि परंपरागत रूप से झंडोत्तोलन कर तिरंगा को सलामी दी। नील गगन में लहराते तिरंगे को विद्यालय के चारों सदन के बच्चों ने गरिमा पूर्ण परेड के माध्यम से तिरंगे को सलामी दी साथ हीं बच्चों के करतल ध्वनि से पूरा प्रांगण गुंज उठा।
इस विशेष अवसर पर विद्यालय परिसर में वंदे मातरम थीम पर मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। नन्हे – नन्हे बच्चों ने जहां दक्षिण भारत की सांस्कृतिक वेशभूषा में अपनी प्रस्तुति दी, वहीं बच्चियों ने राजस्थानी, बंगला आदि भाषाओं में लोक नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को मनोरंजक बना दिया। यहां बच्चियों ने फौजी एवं किसान भाइयों के नाम जीवंत नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने सराहा। स्कूली बच्चों ने वंदे मातरम के अलावे कई देशभक्ति गीत गाए और एक छोटे भारत का रूप प्रस्तुत किया।
जानकारी देते हुए डीएवी ढोरी के साधु चरण शुक्ला ने बताया कि गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि रंजय सिन्हा ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए शुभाशीष दिया। उन्होंने प्राचार्य तथा उनके टीम की भी प्रशंसा तथा कहा कि डीएवी शिक्षण पाठ्यचर्या के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं खेलकूद के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सीसीएल द्वारा विद्यालय को आवश्यकतानुसार नए भवन और कमरे जल्द ही मुहैया कराए जाएंगे। उन्होंने इस दुर्गम क्षेत्र में और अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया।
बताया कि बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित जीएम ( माइनिंग) मनोज कुमार पाठक ने कहा कि बच्चों की प्रस्तुति अनेकता में एकता को बढ़ावा देने वाला है। अन्य विशेष अतिथि क्षेत्र के विभागाध्यक्ष मानव संसाधन कुमारी माला ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका नारी सशक्तिकरण एवं नशा उन्मूलन की सराहना की तथा सभी बच्चों को अपना स्नेह दिया। उन्होंने इस अवसर पर स्वरचित कविताओं से भी बच्चों को प्रेरित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
विद्यालय के प्राचार्य अमिताभ दासगुप्ता ने आभार व्यक्त करते हुए अभिभावकों से अनुरोध किया कि विद्यालय के बेहतरी के लिए अपना अमूल्य योगदान दें। कहा कि डीएवी ढोरी भले ही दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्र है, किंतु जब दशरथ मांझी अकेले पहाड़ों के बीच रास्ता बना सकता है तो हम सब मिलकर क्यों नहीं? उन्होंने सभी बच्चों, शिक्षक, शिक्षिकाओं तथा समस्त कर्मचारियों को सफल कार्यक्रम के लिए साधुवाद दिया। मंच का सफल एवं सुन्दर संचालन विद्यालय की छात्रा मोनिका एवं ख्याति ने किया।
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