मनेजर साहब नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन भूमि नाटक का मंचन

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित मनेजर साहब नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन 13 मार्च को भूमि नाटक का सफल मंचन किया गया। उक्त जानकारी कलाकार साझा संघ के सचिव सह चर्चित रंगकर्मी मनीष महीवाल ने दी।

महीवाल ने बताया कि हमारी संस्था द आर्ट मेकर पटना का एक सांस्कृतिक संस्था है। जो विगत 11 वर्षों से बिहार एवं बिहार के बाहर कला के क्षेत्र में कार्य कर रही है। इसी कड़ी में द आर्ट मेकर द्वारा मनेजर साहब की स्मृति में राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन मुख्य मंच पर आशीष पाठक द्वारा निर्देशित एवं स्वाति दुबे द्वारा निर्देशित नाटक भूमि का मंचन पटना के राजेंद्र नगर स्थित प्रेमचंद रंगशाला में किया गया।

महीवाल ने बताया कि आज के मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विधान सभाध्यक्ष नंद किशोर यादव, संरक्षक द आर्ट मेकर मनीषा सिन्हा, रंग निर्देशक संजय उपाध्याय मौजूद थें। उन्होंने बताया कि नाटक शुरू होने के पूर्व प्रेमचंद रंगशाला के प्रांगण में शाम 5:30 बजे न्यू स्वर आंगन का लोक गायन बिपिन कुमार और विजय कुमार झा द्वारा किया गया।

रंगकर्मी महीवाल ने बताया कि प्रस्तुत नाटक भूमि महाभारत के वनपर्व की पृष्ठभूमि पर अर्जुन चित्रांगदा की कथा पर आधारित है। अर्जुन चित्रांगदा की कथा प्रचलित होते हुए भी बहुश्रुत नहीं है। कथा प्रभंजन से शुरू होकर अंत में अर्जुन-चित्रांगदा के जीवन से होते हुए ऐसे प्रश्न पर जाकर खड़ी हो जाती है जहां चरित्र मिथक होते हुए भी आधुनिक स्त्री-पुरुष हो जाते हैं और उनके प्रश्न हो जाते हैं। जहां चित्रांगदा संपूर्ण नारी जाति का प्रतिनिधित्व करती है, तो अर्जुन संपूर्ण नर जाति का।

प्रस्तुत नाटक में बताया गया कि भू-स्वामी बनने की चाह हर मनुष्य की होती है। वो जीवन भर इस प्रयास में रहता है। जब ये चाह लालच में बदल जाती है तब महाभारत भी उसे पूरा नहीं कर पाती। इतने युद्धों से हो कर भी मनुष्य आज भी भूमि के वर्चस्व के लिए लड़ रहा है। पर स्त्री कोई भूमि नहीं।

ऐसा क्या है कि आदमी ने इतिहास से कुछ नहीं सीखा। यही खोज हमें मिथकों तक ले जाती है। भूमि की भूमि भी यही है जिस पर जाना पहचाना लेकिन असफल प्रेम गीत है, जिसका निर्णय आनेवाली पीढ़ी पर छोड़ दिया गया है। जिसका प्रतिनिधित्व बब्रुवाहन करता है।

प्रस्तुत नाटक भूमि में चित्रांगदा स्वाति दुबे, अर्जुन हिमांशु तिवारी, बबरुवाहन वंदिता सेठी, प्रभंजन शिवकर सपरा, महारानी सृष्टि, पोगड़े
शिव उत्सव हंडे आदि किरदार को कलाकारों ने जीवंत कर दिया है।

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