आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में मुकदमा दर्ज होते ही तत्कालीन गोरौल थानाध्यक्ष फरार
गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिला के हद में लक्ष्मी नारायणपुर भगवानपुर कॉलेज की छात्रा संजना कुमारी जो गत 27 मई को कॉलेज से लौटने के क्रम में गायब हो गई थी। जिसकी सूचना देने के लिए उसके माता-पिता भगवानपुर तथा गोरौल थाना का चक्कर लगाते रहे, लेकिन पुलिस ने गुमसुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं किया और ना ही लापता छात्रा को खोजने का प्रयास किया।
सबसे दुख:द बात यह रही कि थाने की पुलिस छात्रा के माता-पिता को यह कहकर प्रताड़ित करती रही कि जवान लड़की है कहीं भाग गई होगी। पता कीजिए लौट कर आएगी। लेकिन घटना के 44 दिनों के बाद छात्रा का शव एक मकई के खेत में जमीन के नीचे से बरामद किया गया। शव पूरी तरह गल चुका था। शव के पास लापता छात्रा का स्कूल बैग और आई कार्ड बरामद होने से उसकी पहचान हुई।
इस घटना से स्थानीय रहिवासियों में काफी आक्रोश था। पुलिस के बड़े अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। लेकिन सबसे आश्चर्यजनक घटना यह हुई कि गोरौल थानाध्यक्ष रौशन कुमार द्वारा अपराधी के मेल में आकर छात्रा के हत्या का मामला उसके पिता, माता, बहन और चाचा के विरुद्ध में दर्ज कर दिया। जिसकी जानकारी होने पर स्थानीय रहिवासियों में काफी आक्रोश था।
पुलिस के उच्च अधिकारियों की जांच के बाद यह मामला फर्जी पाया गया। इसके बाद गोरौल थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष रौशन कुमार के खिलाफ आरक्षी अधीक्षक वैशाली के निर्देश पर गोरौल थाना में ही प्राथमिकी की गई है। गोरौल थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष के बयान पर यह प्राथमिकी दर्ज की गयी है।
इस संबंध में बताया गया है कि गोरौल के पीरापुर में बीते 10 जुलाई को एक युवती का खेत में शव बरामद हुआ था। युवती का शव बरामद होने के दिन ही शाम में युवती के अपहरण और हत्या के आरोपित को थाना पर तत्कालीन थानाध्यक्ष रौशन कुमार द्वारा बुलाया गया। थानाध्यक्ष द्वारा आरोपित के साथ मिलकर पीड़िता के परिजनों पर ही प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। इसकी जानकारी भी वरीय अधिकारियों को नहीं दी गई।
इस मामले की जानकारी मिलते ही सबसे पहले महुआ एसडीपीओ द्वारा मृतका के परिजनों पर किए गए प्राथमिकी को फाल्स किया गया। वहीं एक पुलिस पदाधिकारी द्वारा किया गया यह आपराधिक कृत्य है। इसके बाद एसपी के निर्देश पर गोरौल के प्रभारी थानाध्यक्ष सुनील कुमार के बयान पर तत्कालीन थानाध्यक्ष रौशन कुमार पर प्राथमिकी की गई है। घटना के संबंध में मृतक के पिता वीरचंद्र सिंह एवं मां गीता देवी ने बताया था कि उनकी पुत्री 27 मई को एलएन कॉलेज भगवानपुर गयी थी, जो वापस नहीं लौटी। इसकी शिकायत भगवानपुर पुलिस से की गई थी।लेकिन कोई करवाई नहीं हुई।

परिजनों ने गांव के ही रूपेश कुमार पर अपने साथियों के साथ मिलकर पहले उसकी पुत्री का अपहरण तथा दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया था। इस मामले में कार्रवाई नहीं करने पर एसपी ने गोरौल थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया और एसपी की अनुशंसा पर भगवानपुर थानाध्यक्ष को भी डीआईजी ने निलंबित कर दिया था। लेकिन युवती का शव मिलने के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष रौशन कुमार द्वारा शव मिलने के बाद आनन फानन में एक एफआईआर दर्ज किया गया। जिसमें संजना के पिता, बहन और उसके चाचा को अभियुक्त बना दिया गया था।
इस मामले का अनुसंधान कर्ता थाने के एसआई अभय शंकर सिंह को बना दिया गया। जैसे ही इस मामले की जानकारी एसपी को हुई एसपी ने थानाध्यक्ष पर जन सेवक होते हुए किसी को क्षति पहुंचाने के लिए गलत दस्तावेज बनाने के आरोप में प्राथमिकी कराई। एफआईआर होने के बाद से पूर्व थानाध्यक्ष का पता नहीं चल रहा है।
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