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श्रावणी सोमवारी स्नान के लिए बाबा हरिहरनाथ तैयार-मुख्य अर्चक

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चंद्र शास्त्री एवं अर्चक आचार्य पवनजी शास्त्री ने 13 जुलाई को एक भेंट में बताया कि बाबा हरिहरनाथ मंदिर में श्रावण माह की प्रथम सोमवारी के अवसर पर जलाभिषेक के लिए मंदिर न्यास द्वारा सभी तैयारी पूरी की जा चुकी है। प्रशासन द्वारा स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पर्याप्त पुलिस की व्यवस्था की गई है। कहा कि स्नानार्थी अरघा के माध्यम से जलाभिषेक करेंगे।

बताया गया कि बाबा हरिहरनाथ मंदिर के भीतर जलाभिषेक के लिए पहुंचने के लिए महिला और पुरुष भक्तों के लिए अलग – अलग रास्ते बनाए गए हैं। उसे बैरिकेडिंग किया गया है। उन्होंने बताया कि श्रावण माह में और प्रत्येक सोमवारी को बाबा हरिहरनाथ पर जलाभिषेक करने वालों की इच्छित मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा कि हरिहरक्षेत्र की खास बात यह भी है कि यह गंगा -गंडक संगम तीर्थ भी है। दो पवित्र नदियों का संगम स्थल है। दोनों ही भगवान श्रीहरि विष्णु से जुड़े हैं। देवी गंगा भगवान शिव से भी जुड़ी हैं। इसलिए उन्हें हर-जटा जुट वासिनी भी कहा जाता है। श्रावण माह में संगम स्नान और संगम के जल से बाबा हरिहरनाथ का जलाभिषेक करने से समस्त पापों का हरण होता है।

बाबा हरिहरनाथ मंदिर परिसर में हैं इन देवी – देवताओं का निवास

ज्ञात हो कि, बाबा हरिहरनाथ मंदिर परिसर में मंदिर के पीछे पश्चिम तरफ पूर्वाभिमुख आठ लघु मंदिर अवस्थित हैं, जिनमें दुर्गा मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, सरस्वती मंदिर, श्रीगजेन्द्र मोक्ष भगवान एवं गज ग्राह, गणेश मंदिर, श्रीश्री 108 शंकर मंदिर, बजरंग बली मंदिर एवं मां पार्वती मंदिर शामिल है। इन सभी लघु मंदिरों में स्थापित देवी- देवताओं की बाबा हरिहरनाथ के साथ ही नित्य दिन प्रातःकालीन एवं संध्याकालीन आरती और पूजा होती रहती है। सभी मंदिरों की देखरेख पुजारियों के अधीन है। इनकी पूजा -अर्चना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती है।

नवग्रह देवता करते हैं तीर्थयात्रियों के सभी कष्टों का निवारण

बाबा हरिहरनाथ के मुख्य द्वार के सटे उत्तर नवग्रह देवताओं का निवास स्थान यानि मंदिर है। इन नवग्रह देवताओं मे प्रथम सूर्य हैं इन्हें ग्रहों का राजा माना जाता है। वैदिक चंद्र देवता सोम भी एक ग्रह हैं। भौम यानि भूमि पुत्र मंगल भी यहां हैं। इन्हें लाल ग्रह भी कहा जाता है। इन्हें वृश्चिक और मेष राशि का स्वामी माना जाता है। बुध भी हैं। इन्हें चन्द्रमा और तारा का पुत्र माना जाता है। शुक्र जिन्हें असुरों का देवगुरु माना जाता है। शनि हिन्दू ज्योतिष में नौ मुख्य खगोलीय ग्रहों में से एक है। सूर्य और छाया के पुत्र हैं। राहु एवं केतु की गणना भी इन्हीं 9 ग्रहों में शामिल है।

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