फिरोज आलम/जैनामोड़ (बोकारो)। झारखंड सरकार (Jharkhand Government) के द्वारा भोजपुरी-मगही, अंगीका भाषा (Language) को जिलों में अंगीकार करने के खिलाफ जरीडीह प्रखंड (Jaridih block) के गायछंदा गांव निवासी समाज सेवी अयूब अंसारी ने 4 जनवरी को प्रेस वार्ता कर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि भाषा तथा हमारी संस्कृति ही हमारी झारखंडी पहचान है। इनका अतिक्रमण करना वे कत्तई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि भोजपुरी-मगही को जिलों में मान्यता देने से सबसे ज़्यादा खतरा संस्कार, संस्कृति, सभ्यता एवं व्यवहार पर हमला होगा। उन्होंने कहा कि बोकारो-धनबाद की पहचान खोरठा, कुरमाली, संथाली, बंगला एवं अन्य आदिवासी भाषा से है।
यदि इनका दोहन किया जाय और भाषा विलोपित हो जाय तो इनका इतिहास भी विलोपित हो जायेगा। क्या यही चाहते हैं, सीएम हेमन्त सोरेन? यदि नही तो तुरंत इसे वापस लिया जाय।
अंसारी ने कहा कि यदि भोजपुरी-मगही लोगों के साथ कम्पीटिशन करके नौकरी लेना ही था तो, झारखंड अलग करने की आवश्यकता क्या थी। हजारों लोगों का बलि क्यों चढ़वाया। हजारों बच्चों को अनाथ क्यों किया? हज़ारों महिला को विधवा क्यों बनाया? झारखंड की झारखंडी जनता इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी-मगही भाषी के बिना मांगे झारखंडियों के माथे पर थोपा जा रहा है। इसे जल्द से जल्द वापस लिया जाए, अन्यथा झारखंड की अमन-पसंद जनता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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