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उत्कृष्ट भूमिका निभाने वालो को किया गया सम्मानित

उत्कृष्ट भूमिका निभाने वालो को किया गया सम्मानित

प्रहरी संवाददाता/मुंबई। मलाड (पश्चिम) स्थित शारदा ज्ञानपीठ इंटरनेशनल स्कूल (Sharda  Jnanpith International School) के सभागृह में अखिल ब्रह्म विज्ञान संस्थान, मुंबई द्वारा डॉ. भगवान तिवारी के मार्गदर्शन में तुलसी जयंती का आयोजन किया गया।

इस समारोह की अध्यक्षता शारदा ज्ञानपीठ के संस्थापक डॉ.शारदा प्रसाद शर्मा (Dr Sharda Prasad Sharma) ने किया। समारोह के मुख्य अतिथि वेदमूर्ति गोरक्षनाथ पैठणकर अपने शिष्यों के साथ उपस्थित थे। वहीं इस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में पधारे राम कुमार पाल ने भगवान परशुराम के मंदिर के लिए संस्था को दो लाख ग्यारह हजार रुपए देने की घोषणा की।

खबर के मुताबिक इस समारोह का शुभारंभ करते हुए उन्होंने तीस हजार रुपये दानपेटी में डाला एवं ब्रह्म विज्ञान संस्थान की प्रशंसा की। नालासोपारा आयुर्वेद कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने मंदिर निर्माण के लिए भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया है।

वहीं अतिथियों में चंद्रिका राय, स्वागताध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने तुलसीदास के जीवन के अनछुए पहलुओं को श्रोताओं के सामने प्रस्तुत किया। समारोह में विशेष रूप से पूर्व एस. टी. पी. आर.आर. पाण्डेय, एम. के. चौबे, आय. पी. सी. के अध्यक्ष डॉ. परमिंदर पाण्डेय, समन्वय संकल्प के संस्थापक अनिरुद्ध पाण्डेय भी मौजूद रहे।

इस समारोह में पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्था की ओर से अनिल तिवारी को डॉ. महावीर अधिकारी पुरस्कार, समाजसेवा के पैरोकार समाजसेवी शिक्षाविद् चंद्रवीर बंशीधर यादव को शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय लेखन कार्य हेतु डॉ. श्रीधर मिश्र पुरस्कार, रवीन्द्र कुमार दुबे को ब्रह्मर्षि वसिष्ठ पुरस्कार, साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बालकेश पाण्डेय को स्वामी रामानंद पुरस्कार, जवाहरलाल निर्झर को डॉ.सी.एल्. प्रभात पुरस्कार प्रदान किया गया।

डॉ. श्रीभगवान तिवारी, आचार्य रामव्यास, जनार्दन मिश्र, डॉ.अवनीश सिंह, डॉ. अशोक चौहान, अजय शुक्ल आदि पदाधिकारियों ने अतिथियों का सम्मान किया।

डॉ. श्रीभगवान तिवारी ने संस्था के उद्देश्य को स्पष्ट किया एवं भगवान परशुराम की तरह ब्राह्मणों को त्यागी एवं समर्पित बनने की प्रेरणा दी। तीनों संस्थाओं के पदाधिकारी समारोह में उपस्थित थे। वेदमूर्ति गोरक्षनाथ पैठणकर ने संस्कार-शिविर में अमूल्य योगदान का आश्वासन दिया।

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