प्रहरी संवाददाता/जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम)। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि 25 अक्टूबर से आरम्भ होने वाले छठ महापर्व का पहला दिन होता है। इस दिन व्रत धारी माताएँ विशुद्ध मन और तन से इस पर्व को विधिवत उठाती हैँ। उक्त विचार प्रसिद्ध ज्योतिष, वास्तु व् तंत्र विशेषज्ञ आचार्य आनंद शर्मा के है।
आचार्य आनंद शर्मा बताते है कि इस दिन प्रसाद स्वरुप मे प्रयोग होने वाले गेहूं को शुद्ध जल में भींगोकर सुखाया जाता है। साथ ही विशेष पवित्र जल से स्नान कर व्रतधारी द्वारा लौकी की सब्जी व् भात बनाया जाता है। इसे बनाने मे चूल्हा से लेकर समस्त बर्तन का भी शुद्धता और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।
आचार्य शर्मा के अनुसार 36 घंटे निर्जला उपवास को शुरू करने से पहले लौकी और भात का सेवन शरीर को ऊर्जा देकर तैयार करता है, जिसके कारण शरीर मे पोषक तत्व और पानी की कमी ना रहे। शरीर इस व्रत को करने के लिए तैयार रहे..
उन्होंने बताया कि छठ के पावन गीतों में परिवार के साथ लौकी की सब्जी, चना दाल की बनी सब्जी और भात खाने का दिव्य आनंद शब्दों मे बखान नहीं किया जा सकता।इसलिए इस दिव्य अनुभूति के लिए वर्तधारियों को साल भर इंतजार रहता है। इसके अलावा यह पर्व स्वस्थ के लिए जरुरी चीज़े जैसे स्नान शरीर को बाहर से ठीक रखता हैँ और खाय यानि सही शुद्ध भोजन शरीर को अन्दर से ठीक रखता है।
सही दिनचर्या, सूर्योदय से पूर्व उठ कर ताम्बे के लोटे से सूर्य को जल देना अति शुभ और आरोग्य वर्धक होता है।
आचार्य शर्मा के अनुसार नहाय खाय जीवन के सन्देश को देता है। समस्त व्रत धारियों को इस नहाय खाय पर्व की शुभकामनायें। जय छठी मईया।
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