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पाठक के जाते ही बिहार की शिक्षा व्यवस्था कहीं पहले जैसी न हो जाय

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिला में कुल 2078 सरकारी स्कूल हैं। बिहार के पूर्व शिक्षा सचिव के. के. पाठक की वजह से पूरे बिहार में शिक्षा के स्तर में सुधार एवं बदलाव दिखने लगा था। अधिकारी से लेकर शिक्षक प्रोफेसर अब राइट टाइम हो गए थे।शिक्षण संस्थानों में शिक्षण का माहौल बन गया।

पाठक के कार्यकाल में बिहार सरकार के प्रयास से सभी स्कूलों में आधारभूत संरचना के विकास, पेयजल की व्यवस्था, प्रयोगशाला, खेल मैदान, बेंच डेस्क तथा नि:शुल्क किताब आदि की व्यवस्था की गयी थी। निकम्मे शिक्षकों की भी शामत आयी थी।

इस संबंध में वैशाली के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 22 जून को एक भेंट में बताया कि वैशाली जिले के सभी नव प्रार्थमिक, प्राथमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों में लगभग सत्तर हजार बेंच डेस्क का क्रय विभागीय मानक के अनुरूप किया गया है। किसी बच्चे को जमीन पर नहीं बैठना पड़े, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है।

बताया गया कि वैशाली जिले के सभी प्राथमिक विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत मध्यान भोजन की व्यवस्था की गई है। जिले के कुल 2074 प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को मध्यान भोजन खिलाने हेतु थाली का क्रय किया गया है।

सभी प्राथमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों की साफ सफाई हेतु हाउस कीपिंग का कार्य एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है। जिले के सभी प्रारंभिक विद्यालयों के कक्षा 1 से 3 तक के छात्र-छात्राओं के मानसिक विकास हेतु एफएलएन कीट उपलब्ध कराया गया है, जिसमें बैग, वॉटर बॉटल एवं पठन सामग्री उपलब्ध कराया गया है।

डीएसओ ने बताया कि वैशाली जिला के सभी 21 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में भवन की मरम्मती एवं जीर्णोद्धार का कार्य कराया जा रहा है। बच्चों के खेलकूद के लिए खेल मैदान को विकसित किया जा रहा है। साथ ही जिले के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में खेलकूद की सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

कंप्यूटर में दक्ष बनाने हेतु जिले के कुल 224 प्राथमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी लैब का अधिष्ठापन किया गया है और 154 उच्च माध्यमिक विद्यालय में आईसीटी लैब का अधिष्ठापन की प्रक्रिया जारी है।

कुल मिलाकर वैशाली जिले के सरकारी स्कूलों का कायाकल्प हो रहा हैं। लेकिन आम जनता को आशंका है कि शिक्षा सचिव के. के. पाठक के जाते ही शिक्षा व्यवस्था कही पहले जैसी न हो जाय।

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