गंगा कहे मन की पीड़ा रोते रोते नृत्य नाटिका की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोहा
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित लोक सेवा आश्रम के कला मंच पर 7 अगस्त की संध्या आयोजित 85वां संगीत, वाद्य एवं नृत्य सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नृत्यांगना आदित्या ने गंगा कहे मन की पीड़ा रोते रोते नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।
गुरु आदित्या द्वारा निर्देशित इस नृत्य नाटिका ने एक ओर गंगा के अवतरण की पौराणिक कथा को प्रदर्शित किया, तो दूसरी ओर वर्तमान दशा में गंगा की व्यथा से दर्शकों को झकझोर कर रख दिया। यह नाटिका भागीरथ की तपस्या से प्रारंभ होते हुए शिव के द्वारा गंगा को मस्तक पर धारण करने की नृत्यात्मक प्रस्तुति के साथ गंगा के द्वारा प्रश्न क्या मुझे मुक्त करवाने फिर कोई भागीरथ आयेगा पर संपन्न होती है।

इस नृत्य नाटिका में गंगा की भूमिका में आदित्या, शिव एवं भागीरथ की भूमिका में अमित कुमार के साथ नाटिका को कथा के द्वारा प्रस्तुत करने में खुशी कुमारी गुप्ता, मिनाक्षी पांडेय, स्नेहा पांडेय, श्रेया पांडेय, विनीता कुमारी व सलोनी कुमारी ने नृत्य की भाव भंगिमाओं एवं मुद्राओं से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। वहीं नाटिका में काल्पनिक पात्र कालिमा ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। कालिमा के पात्र ने गंगा की अविरल धारा के साथ प्रवाहित हो रहे प्रदूषण की छवि को प्रदर्शित कर इसके नकारात्मक पक्ष को दर्शकों के समक्ष रखा।
इस विशेष प्रस्तुति के लिए नृत्यांगना आदित्या को कथक साम्राज्ञी सम्मान से अलंकृत किया गया। दूसरी प्रस्तुति में नृत्य संरचना सावन मनभावन में कजरी के विभिन्न शैलियों को नृत्यांगनाओं ने बखूबी प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को रस की फुहार से सराबोर कर दिया। मंगला चरण में कथक नर्तक अमित कुमार, मीनाक्षी पांडेय व खुशी कुमारी गुप्ता ने गणेश वंदना प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।
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