प्रहरी संवाददाता/तेनुघाट (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में बेरमो अनुमंडल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट में स्थापना दिवस मनाया जा रहा है।
स्थापना दिवस के अवसर पर बेरमो जिला बनाओ संघर्ष समिति संयोजक संतोष नायक, अधिवक्ता वकील प्रसाद महतो, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कामेश्वर मिश्र ने 5 दिसंबर को सभी जनमानस से अपील किया है कि 6 दिसंबर को स्थापना दिवस में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनावे।
जानकारी के अनुसार बेरमो जिला बनाओ संघर्ष समिति की ओर से स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया जा रहा है। मालूम हो कि बेरमो अनुमंडल का स्थापना 6 दिसंबर 1972 को किया गया था। उसी दिन गिरिडीह को भी जिला का दर्जा प्राप्त हुआ था। बेरमो अनुमंडल तथा गिरिडीह को जिला की स्थापना तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय द्वारा गिरिडीह झंडा मैदान में किया गया था।
बेरमो अनुमंडल स्थापना के बाद 1975 में गिरिडीह से स्थानांतरित होकर तेनुघाट में मुख्यालय बनाया गया था। बेरमो अनुमंडल को अनुमंडल बने 50 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुमंडल का विकास पूर्ण रूप से नहीं हो सका है।
जो मील पत्थर साबित हो रहा है। बेरमो अनुमंडल मुख्यालय तेनुघाट में एक इंच जमीन भी गैर सरकारी नहीं है, जिसके कारण यहां का विकास रुका हुआ है। तेनुघाट की सारी जमीनें सिंचाई विभाग की है। सिंचाई विभाग किसी को लीज पर या भाड़े पर देना नहीं चाहती।
अवैध रूप से रह रहे रहिवासियों ने कई बार विभाग से जमीन पर वोटर लिस्ट भरने की मांग समय-समय पर करते रहे हैं, लेकिन आज तक वह पूरी नहीं किया जा सका है। एशिया महादेश का सबसे बड़ा मिट्टी का डैम तेनुघाट है जो प्रति वर्ष लगभग 22 करोड़ रुपये सरकार को पानी बेचकर राजस्व प्राप्त होता है। उसका 10 प्रतिशत भी झारखंड सरकार (State Government) डैम के रख-रखाव मेंटेनेंस में खर्च नहीं करता।
पर्यटन के दृष्टिकोण से कई संभावनाएं यहां है लेकिन सरकार द्वारा पर्यटन के लिए कोई बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। अनुमंडल बनने के बाद सिविल कोर्ट के अलावा कोई स्थाई भवन का निर्माण आज तक नहीं हो सका है। अनुमंडल पदाधिकारी का कार्यालय पहले सिंचाई विभाग के भवन में चलता था।
वर्ष 1997 में अनुमंडल कार्यालय का अलग भवन बना। दुर्भाग्य की बात यह है कि उसके बाद आज तक भवन का किसी प्रकार का रखरखाव मेंटेनेंस नहीं हो सका और जर्जर अवस्था में आज भी अनुमंडल कार्यालय का कार्य सुचारू ढंग से चलाया जा रहा है।
बताया जाता है कि बेरमो अनुमंडल कार्यालय बरसात के दिनों में इतने जर्जर हो गया है कि जगह जगह कार्यालय में पानी टपकता है। कर्मचारियों को मजबूरन प्लास्टिक ढककर फाइलों का रख रखाव व सुरक्षा करना पड़ता है।
अनुमंडल में दर्जनों पदाधिकारियों के परिजन है परंतु अनुमंडल पदाधिकारी के अलावा सभी पद खाली एवं पदभार पर चलते आ रहा है। डीसीएलआर और रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पद वर्षो से रिक्त है। ऐसे में क्या आने वाले समय में इस स्थिति में जिला का निर्माण हो सकेगा। राजनेताओं द्वारा केवल अपने भाषणों में इसे जिला बनाने का नारा दिया जाता है और चुनाव के बाद ठंडे बस्ते में डाल कर सो जाते है।
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