प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। आदिवासी सेंगेल द्वारा एक जनवरी को सरना स्थल पर खरसांवां के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
मौके पर झारखंड प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू ने कहा कि एक और 2 जनवरी आदिवासी समाज के लिए काला दिन है। चूकि इसी दिन एक जनवरी 1948 को खरसांवां तथा पश्चिमी सिंहभूम जिला को उड़ीसा में विलय करने का विरोध करने के लिए हजारों आदिवासी एकत्रित हुए थे।
उन्होंने बताया कि उक्त सभा को आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा संबोधित करने वाले थे, किन्तु उड़ीसा पुलिस ने उन निहत्थे आदिवासियों के उपर अंधाधुंध गोलियां चलाई थी, जिसमें हजारों आदिवासी शहीद हो गये थे। खरसांवां बाजार के बीचोंबीच एक कुआं है जिसमें मृत, अर्ध मृत सबको कुएं में डाल दिया गया। ये आज़ाद भारत के इतिहास में जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी बड़ी घटना थी, लेकिन अब तक इस पर न कोई जांच हुई और न उन शहीदों को सम्मान मिला।
आदिवासी सेंगेल अभियान झारखंड सरकार से मांग करती है कि एक उच्च स्तरीय समिति बना कर जांच की जाए तथा शहीदों की पहचान कर उन्हें सम्मान दिया जाए। उन्होंने बताया कि उसी प्रकार 2 जनवरी 2006 को उड़ीसा के कलिंग नगर में टाटा स्टील कंपनी द्वारा जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। उड़ीसा पुलिस द्वारा 12 आंदोलनकारी को गोलियों से भून दिया गया था। इसलिए एक और 2 जनवरी आदिवासी समाज के लिए बहुत दु:ख का दिन है।
मौके पर सेंगेल मांझी परगना मंडवा प्रदेश अध्यक्ष चन्द्र मोहन मार्डी, सरना धर्म मंडवा प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार मुर्मू, हजारीबाग जोनल हेड विजय टुडू, बोकारो जिला संयोजक संतोष सोरेन, कसमार प्रखंड अध्यक्ष बिशेश्वर मुर्मू, पेटरवार सेंगेल संयोजक हरिश्चंद्र मुर्मू, संजू हेम्ब्रम, प्रियंका किस्कू आदि उपस्थित थे।
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