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आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में जनतांत्रिक मूल्यों को समाहित करे-आनंद टूडू

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। आदिवासी सेंगल अभियान (एएसए) जोनल संयोजक आनंद टुडू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल 10 दिसंबर को बोकारो समाहरणालाय में जिला उपायुक्त (Deputy Commissioner) से भेंट कर पत्र सौंपा। पत्र में प्रतिनिधि मंडल द्वारा आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में जनतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को समाहित करने की मांग की है।

बोकारो जिला उपायुक्त कुलदीप चौधरी को प्रेषित पत्र में आदिवासी सेंगल अभियान के जोनल संयोजक टुडू के अलावा एएसए के झारखंड प्रदेश संयोजक करमचंद हांसदा, बोकारो जोनल हेड अरुण किस्कू, बोकारो जिला संयोजक भीम मुर्मू, पेटरवार प्रखंड अध्यक्ष सुरेश कुमार टुडू, बिहारी मरांडी, गुलाबी देवी, सविता टुडू आदि उपस्थित थे।

सेंगेल अभियान द्वारा उपायुक्त को प्रेषित पत्र में कहा गया कि वह बोकारो जिला के सभी प्रखंडों में संताल आदिवासी गांव समाज की व्यवस्था के तहत जनतंत्र एवं संविधान, कानून, मानव अधिकार लागू नहीं है।

समाज में अन्याय, अत्याचार, शोषण खत्म होने की जगह पर बढ़ रहा है। इसलिए आदिवासी सेंगेल अभियान यह मांग करती है कि ग्राम प्रधान या मांझी बाबा की नियुक्ति प्रत्येक गांव के स्त्री-पुरुष मिलकर जनतांत्रिक पद्धति से एक निश्चित अवधि 1 या 2 साल के लिए करें।

पत्र में कहा गया है कि वर्तमान मांझी बाबा परंपरा के नाम पर वंशानुगत नियुक्त होते हैं, जिसमें 99 प्रतिशत अनपढ़, पियक्कड़ कानून आदि से अनभिज्ञ होते हैं। इसलिए नियुक्ति परंपरा से नहीं बल्कि, जनतांत्रिक होना चाहिए।

पत्र में कहा गया है कि वर्तमान मांझी बाबा के गुंडागर्दी और मनमानी के कारण गांव समाज में जुर्माना लगाना, सामाजिक बहिष्कार करना, डायन बिसाही के नाम पर निर्दोष महिला की हत्या एवं प्रताड़ना करना, वोट को हरिया, दारु, चखना में खरीद बिक्री करना।

ईर्ष्या, द्वेष, नशापान, अंधविश्वास आदि को बढ़ावा देना इनकी आदत बन गई है। यही नहीं बल्कि ग्राम प्रधानों का अपराधियों एवं दलालों के साथ सांठगांठ से आदिवासी गांव समाज की हालात आज खोखला हो चुकी है।

पत्र में कहा गया कि मांझी बाबा आदि को दिए जा रहे वर्तमान मासिक मानदेय प्रतिमाह 1 हजार को बंद किया जाए और जनतांत्रिक पद्धति से चुने जाने वाले मांझी बाबा का मासिक मानदेय 5 हजार किया जाए। साथ ही जिला प्रशासन (District Administration) के तरफ से अवयस्क (18 वर्ष से कम उम्र वाले) व्यक्ति को मांझी बाबा नियुक्ति प्रक्रिया से अलग रखा जाए।

पत्र में कहा गया कि जो आदिवासी धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म को अपना चुके हैं, उन्हें अविलंब मांझी बाबा और पुजारी (नाइके बाबा) पद से हटाया जाए, क्योंकि यह धार्मिक घुसपैठ और गैरकानूनी है। पत्र में कहा गया कि जो संताल आदिवासी नहीं है, उन्हें संताल गांव समाज का मांझी परगना व्यवस्था में पदधारी नहीं बनाया जा सकता। वैसे लोगों को अविलंब बर्खास्त किया जाए।

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