एस.पी.सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना (Patna the capital of Bihar) के गांधी मैदान के समीप स्थित कालिदास रंगालय में 26 नवंबर की रात्रि नेफा की एक शाम नाटक का मंचन किया गया। उक्त जानकारी कलाकार साझा संघ के सचिव एवं चर्चित हास्य कलाकार मनीष महिवाल ने दी।
महिवाल के अनुसार नाटक नेफा की एक शाम बेहतरीन नाटक है। जिसमें बताया गया है कि मातई के दोनों बेटे निम्मो और देवल के बीच कटुता का कारण है सुहाली। निम्मो जहां सुहाली के प्रेम पास में बंधा होता है वही देवल सरदार गोगो के साथ एक गुप्त गुरिल्ला संगठन बनाकर चीनी सेना का प्रतिरोध करता है।
घायल चीनी जासूस बागचू को मातई ही बचाती है, परंतु बाद में वही वांगचु देवल और गोगो को मारना चाहता है। तभी मातई का बड़ा बेटा निम्मो बांगचू के गतिविधियों को कुछ समझ जाता है और बड़ी समझदारी से वांगचू और साथी फुंगशी को मार गिराता है।
चीनियों के कैद से भागा भारतीय फौजी मातई का स्नेह पाकर गर्व महसूस करता है और फिर से लड़ाई के लिए चला जाता है।
चीनी आक्रमण में अनाथ हुई शिकाकाई मातई के शरण में आकर देवल की पत्नी बन चीनियों से लोहा लेती है।
चीनी कैंप की जासूस और नीम्मो को अपने प्रेमपाशा में बांध कर रखने वाली सुहाली निम्मो के हाथों मारी जाती है। मातई के दोनों बेटे नीमो और देवल चीनियों को सियांग नदी पार करने से रोकने में सफलता प्राप्त करते हैं और देश के लिए शहीद हो जाते हैं।
मातई वीरांगना की तरह अपने बेटों को मातृभूमि की वेदी पर बलि देकर भी विचलित नहीं होती है और विजय का बिगुल सुन कर शिकाकाई को गले लगा उसे ढांढस बंधाती है। महिवाल के अनुसार चीनी आक्रमण के समय अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सियांग नदी के तट पर आदिवासियों के शौर्य और बलिदान को चित्रित करता है नाटक नेफा की एक शाम।
उन्होंने बताया कि मातई की भूमिका में अनिता कुमारी वर्मा, नीम्मो की भूमिका में डॉक्टर सुभाष कृष्ण, देवल की भूमिका में रणविजय सिंह, गोगो की भूमिका में विष्णु देव कुमार विशु, शिकाकाई की भूमिका में प्रतिज्ञा भारती, सुहाली की भूमिका में रूपाली चौधरी,आदि।
फौजी की भूमिका में आशुतोष निर्भय, वांगचू की भूमिका में रवि पांडेय, फुंगशी की भूमिका में सुमित आर्य ने अपने अभिनय को बेहतर ढंग से प्रदर्शित किया है। जबकि उक्त नाटक के लेखक ज्ञानदेव अग्निहोत्री तथा निर्देशक अरुण कुमार सिन्हा हैं।
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