एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। पुरे महाराष्ट्र में लगभग एक हफ़्ते से ज़्यादा चलने वाले गणेशोत्सव के दौरान जहाँ पूरा महाराष्ट्र उत्सव और मेल-मिलाप में डूबा है, वहीं उपमुख्यमंत्री अजीत पवार भी लगातार दौरों में व्यस्त हैं।
मुंबई से लौटकर मुजफ्फरपुर की युवा कवियित्री सविता राज ने 31 अगस्त को बताया कि प्रदेश भर में गणेशोत्सव की रौनक के बीच उप मुख्यमंत्री पवार जनता से सीधे रू-ब-रू हो रहे हैं। वे कभी किसानों के बीच जाकर उनकी बातें सुनते, तो कभी युवाओं के कार्यक्रमों में शिरकत करते नज़र आते हैं।
सविता राज के अनुसार महाराष्ट्र के बारामती और पुणे ज़िले में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेते हुए उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने विकास और परंपरा, दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने माळेगांव शुगर फैक्ट्री में गणपति बप्पा की पूजा कर गन्ना पौधशाला का उद्घाटन किया। यह परियोजना किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराएगी, जिससे पैदावार बढ़ेगी और खेती टिकाऊ बनेगी। यहां डिप्टी सीएम ने साफ कहा कि आने वाले 50 वर्षों को ध्यान में रखकर गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य करना ही हमारी पहचान है।
बताया कि इंदापुर तालुका में आयोजित शेतकरी मेळावा और कृषी प्रदर्शनी में पवार ने किसानों के साथ सीधा संवाद किया। यहाँ गन्ना खेती में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) की तकनीक को लेकर चर्चा हुई। पवार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार पानी के महत्व को समझते हुए आधुनिक तकनीक, कार्यशालाओं और एआई के ज़रिए खेती को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
दौरे के दौरान पवार युवाओं से भी जुड़े। कण्हेरी वन उद्यान में एडवेंचर स्पोर्ट्स प्रशिक्षण शिविर के समापन पर उन्होंने युवाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए और कहा कि ऐसे कार्यक्रम रोजगार और पर्यटन दोनों के नए अवसर खोलते हैं। साथ ही, उन्होंने शिवसृष्टी थीम पार्क के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया, जहाँ शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े प्रतिरूप तैयार हो रहे हैं। पवार का मानना है कि यह पहल इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।
सविता के अनुसार महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को इस बार राज्य सरकार ने महाल्युक्ति सरकार का राज्योत्सव घोषित किया है। विशेष यातायात व्यवस्था से लेकर सभी विभागों की भागीदारी तक, इसे और भव्य बनाने की तैयारी की गई है। कहा कि महाराष्ट्र के लिए गणेशोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान है। पंडालों और घरों से गूंजने वाला नारा गणपति बप्पा मोरया आज भी आस्था, परंपरा और एकता की गूंज है।
![]()













Leave a Reply