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आंबेडकर सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के मजबूत स्तंभ-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची(झारखंड)। आंबेडकर सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। बाबा साहेब का सपना तभी पूरा होगा, जब समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक उनके अधिकार, सम्मान और अवसर पहुँचेंगे। उक्त बाते आदिवासी–मूलवासी जनाधिकार मंच के उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने बीते 6 दिसंबर को कही।

संविधान निर्माता महामानव, भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की 69वीं पुण्यतिथि पर झारखंड की राजधानी रांची के डोरंडा स्थित आम्बेडकर चौक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यहां आंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

डोरंडा के आंबेडकर चौक पर आदिवासी–मूलवासी जनाधिकार मंच द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और कहा कि झारखंड जैसे राज्य में आज भी हाशिये पर खड़े समाज आदिवासी, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्ग को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने मांग की कि सरकार और प्रशासन बाबा साहेब के सिद्धांतों पर चलते हुए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को अधिकार के रूप में लागू करे। भूमि, वन और जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को सख्ती से लागू करे। जातीय भेदभाव की हर घटना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे। संविधान में प्रदत्त समानता और न्याय के सिद्धांतों को शासन-व्यवस्था का आधार बनाए।

नायक ने कहा की बाबा साहेब का सपना तभी पूरा होगा, जब समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक अधिकार, सम्मान और अवसर पहुँचेंगे। आज उनकी पुण्यतिथि हमें यही संदेश देती है कि संघर्ष अभी अधूरा है और हमें इसे आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने सिर्फ संविधान नहीं लिखा, बल्कि करोड़ों वंचितों-शोषितों को आत्म सम्मान और अधिकार की ज्योति दी। उनकी विचारधारा आज भी हमें समता, स्वतंत्रता और बंधुता का पाठ पढ़ाती है। हमें उनके सपनों का भारत बनाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रोफेसर कृष्णा कान्त रवि, शिव शंकर दास, अशोक कुमार रजक, दीपक पासवान, विनय कुमार दुबे उर्फ पहलवान, मंटू राम, अजय नाग, भुषण राम, मनु तिर्की, कृष्णा राम, रविन्द्र यादव, प्रह्लाद राम, करीमन रजक सहित बड़ी संख्या में स्थानीय रहिवासी, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और मंच के पदाधिकारीगण शामिल हुए।

सभी ने बाबा साहेब की विचारधारा को झारखंड के जन–आंदोलनों की शक्ति बताते हुए इसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर महामानव को याद किया और संविधान की रक्षा तथा सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्धता दुहराई।

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