आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति संसद में झारखंड गंगा महासभा के पदाधिकारी शामिल
भारतवर्ष के कोने-कोने से जुटे हजारों साधु-संत
एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति संसद का समापन हो गया। संस्कृति संसद में हजारों की संख्या में पुरे भारतवर्ष के साधु-संत शामिल हुए। संस्कृति संसद में झारखंड गंगा महासभा के पदाधिकारीगण शामिल हुए। संस्कृति संसद में अद्भुत नजारा दिखा। तीन दिनों में बही ज्ञान की गंगा और अपने सनातन धर्म और संस्कृति का साक्षात्कार हुआ। उक्त जानकारी गंगा महासभा झारखंड प्रदेश मीडिया प्रभारी दीपेश निराला ने 5 नवंबर को दी।
इस अवसर पर गंगा महासभा बिहार-झारखंड अध्यक्ष धर्म चन्द्र पोद्दार ने वाराणसी से बताया कि संस्कृति संसद अपने अंतिम दिवस 5 नवंबर को युवा विमर्श पर केंद्रित रहा। जिसमें कुल 6 सत्र आयोजित किया गया। भारतीय युवा जीवन मूल्य एवं सामाजिक सदाचार, ढाई मोर्चे के युद्ध पर भारत, कला संस्कृति के आवरण में परोसी जा रही विकृति, सत्ता संस्थान बनाम सरकार, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को छिन्न-भिन्न करने के लिए इतिहास लेखन में कम्युनिस्टो के षड्यंत्र तथा राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की सांस्कृतिक सूत्र।
पोद्दार ने बताया कि उनके द्वारा सत्ता संस्थान बनाम सरकार विषय पर चौथे सत्र का संचालन किया गया। उन्होंने बताया कि यह सत्र पूर्व की सरकारों का सिस्टम और वर्तमान सरकार के बीच जो तनाव है, जिसकी वजह से सरकार बहुत कुछ चाह कर भी नहीं कर पाती है, इसी से संबंधित सत्र था। बताया कि इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के डीन रह चुके डॉ चन्द्रकांत प्रसाद सिंह इसके वक्ता थे।
ज्ञात हो कि, इस आयोजन में विभिन्न प्रान्तों से आये सैकड़ों की संख्या में गणमान्य उपस्थित थे। बिहार-झारखंड से पोद्दार के अलावे आशीष दुबे, अनिमेष कुमार, आनंद प्रकाश, शशि श्रीवास्तव, बृख भान अग्रवाल, दीपेश निराला, नवीन तिवारी, रवि शंकर मिश्रा, आशीष कुमार, आशीष कुमार ठाकुर, अंजली चौधरी, राहुल कुमार, योगेंद्र कुमार मंडल आदि शामिल थे।
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