Advertisement

निगम क्षेत्र का विकास के साथ गरीबों का कल्याण भी करे नगर निगम-विजय शंकर नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची शहर का सौन्दर्यीकरण और विकास भी हो, साथ ही साथ फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले गरीबों का कल्याण भी हो। दोनों का विकास संतुलित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे रांची नगर निगम।

उपरोक्त बाते 15 जुलाई को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही। वे रांची शहर मे अतिक्रमण हटाने के नाम पर फुटपाथ पर रोजी रोटी कमाने वाले गरीब गुरबा को उजाड़ने, ठेला, खोमचा जब्त करने, तोड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया मे उक्त बाते कही।

नायक ने कहा कि रांची नगर निगम का यह कर्तव्य है कि वह शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ गरीब और मेहनतकश गरीबों की आजीविका की रक्षा करे। कहा कि मंच को उम्मीद है कि निगम इस दिशा में तत्काल कदम उठाएगा और फुटपाथ दुकानदारों के हितों को संरक्षित करेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड की राजधानी में रांची नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत सड़कों और फुटपाथों पर ठेला-खोमचा लगाने वाले गरीब दुकानदारों के सामान को जब्त करने और उनकी अस्थायी संरचनाओं को तोड़ने की कार्रवाई से हजारों गरीब परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

यह अभियान, जो शहर को अतिक्रमणमुक्त बनाने के नाम पर चलाया जा रहा है, उन गरीब और मजदूर वर्ग के लिए भारी परेशानी का कारण बन रहा है। जिनका जीवन यापन फुटपाथ पर छोटे-मोटे व्यवसायों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि ठेला-खोमचा और छोटी दुकानों को जब्त करने और तोड़ने से सैकड़ों परिवारों की दैनिक आय पूरी तरह बंद हो गई है।

ये सब्जी, फल, चाट, फूल, चाय, खाने की दुकान एवं अन्य छोटे-मोटे सामान बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जब्ती के दौरान सामान को नष्ट कर दिया जाता है, जिससे इन गरीब दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई मामलों में, ये कर्ज लेकर अपना व्यवसाय शुरू करते हैं। सामान नष्ट होने से वे कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं।

नायक ने कहा कि रांची नगर निगम द्वारा इन दुकानदारों के लिए कोई वैकल्पिक स्थान या पुनर्वास योजना नहीं दी गई है, जिसके कारण ये बेरोजगार हो रहे हैं और उनके परिवार भुखमरी के कगार पर हैं। बार-बार की कार्रवाई और सामान जब्ती से इन दुकानदारों में भय और असुरक्षा का माहौल है। उनके बच्चों की पढ़ाई और परिवार की बुनियादी जरूरतें प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में फुटपाथ पर व्यवसाय करने वालों के लिए पुनर्वास आदि व्यवस्थित करने के कई उदाहरण मौजूद हैं, जिन्हें रांची नगर निगम लागू कर सकता है।

नायक के अनुसार दिल्ली सरकार ने वेंडिंग जोन बनाए, जैसे कि सरोजिनी नगर और लाजपत नगर में, अहमदाबाद, गुजरात, भोपाल, मध्य प्रदेश में हॉकर्स कॉर्नर की स्थापना की गई है। गुजरात नगर निगम ने साबरमती रिवर फ्रंट पर स्ट्रीट वेंडर्स के लिए विशेष नाइट मार्केट बनाया है। यहां दुकानदारों को बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित हुई और शहर की सुंदरता भी बनी रही।

रांची नगर निगम का यह कर्तव्य है कि वह शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ गरीब और मेहनतकश की आजीविका की रक्षा करे। हम उम्मीद करते हैं कि निगम इस दिशा में तत्काल कदम उठाएगा और फुटपाथ दुकानदारों के हितों को संरक्षित करेगा।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *